Sanjay Nishad on Brahmins: बलिया/नरेन्द्र मिश्र: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावका बिगुल बजने में अभी महीनों का वक्त है, लेकिन पूर्वांचल की धुरी कहे जाने वाले बलिया में सियासी पारा अभी से उबलने लगा है. योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने गुरुवार को बलिया में ऐसा ‘जातीय बम’ फोड़ा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में भयंकर खलबली मचा दी है.
अपनी ही पार्टी के ब्राह्मण नेता को मंच से सरेआम खरी-खोटी सुनाने से लेकर प्रदर्शनकारियों को खुली चुनौती देने तक, संजय निषाद का यह दौरा विवादों का ‘सुपर-डोज’ बन गया है. आइये जानें उन्होंने और क्या-क्या कहा?
बलिया के गंगा बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित निषाद पार्टी के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में संजय निषाद ने अपने ही नेता कनक पांडेय (Kanak Pandey) पर सीधा निशाना साधा. कनक पांडेय 2027 में बांसडीह (Bansdih) विधानसभा सीट से निषाद पार्टी के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं. मंच से तल्ख तेवर में संजय निषाद ने कहा कि-
‘अगर कनक पांडेय को नेता बनना है तो उन्हें अपनी जाति (ब्राह्मणों) को संभालना पड़ेगा. हम अपनी जाति को संभाल लेंगे. आपकी जाति के लोग निषाद पार्टी का आंदोलन करने (विरोध करने) आए थे, आपकी जाति के लोग आपको विधायक नहीं बनने देना चाहते. वे एक निषाद नेता का अपमान करने आए थे.’
मंत्री जी का पारा यहीं नहीं रुका, उन्होंने सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर निषादों का विरोध करेंगे तो प्रधान भी नहीं बन पाएंगे, विधायक बनना तो बहुत बड़ी बात है. दिलचस्प बात यह थी कि जब मंत्री मंच से यह तल्ख ‘नसीहत’ दे रहे थे, तब टोपी पहने कनक पांडेय दो महिलाओं और दो पुरुषों के बीच हाथ जोड़े चुपचाप खड़े थे.
संजय निषाद के इस दौरे पर सिर्फ मंच के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी भारी बवाल हुआ. PWD डाक बंगले पर छात्र नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री का जबरदस्त घेराव किया. कांग्रेसियों का आरोप था कि मंत्री ने पिछले दौरे में बलिया के लोगों को ‘दलाल’ कहा था. कार्यकर्ताओं ने “संजय निषाद वापस जाओ” और “बलिया से माफी मांगो” के गगनभेदी नारे लगाए.
पुलिस ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ा. इस भारी विरोध से झल्लाए डॉ. संजय निषाद ने विरोधियों को सीधा चैलेंज करते हुए कहा कि बलिया किसी के पिता की धरती नहीं है. यह हमारी भी धरती है. मैं पहले भी आता रहा हूं और आगे भी आऊंगा.
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अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि बलिया तो क्रांतिकारियों की धरती है, उन्होंने सिर्फ अंग्रेजों का साथ देने वालों को ‘गद्दार’ कहा था, न कि बलिया के लोगों को. साफ है, संजय निषाद के इस आक्रामक तेवर ने 2027 की सियासी जंग को अभी से ‘हाई-वोल्टेज’ बना दिया है.
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