मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
CM Yogi on Malegaon Blast Case: मालेगांव बम विस्फोट मामले में एक लंबे इंतजार के बाद जज ने फैसला सुना दिया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सहित सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि बम विस्फोट में जिस मोटरसाइकिल का उपयोग किया गया था, उसके साध्वी प्रज्ञा से जुड़े होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन आरोपियों के खिलाफ यूएपीए (UAPA)नहीं लगा सकते. इस फैसले के बाद अब जमकर बयान-बाजी भी शुरू हो गई.
फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) ने इस फैसले को सत्य की जीत बताया. साथ ही सीएम योगी ने मालेगांव बम विस्फोट मामले में सात आरोपियों को बरी किए जाने पर कांग्रेस पार्टी की कड़ी आलोचना की है.
सीएम योगी ने अपने ट्विटर पर लिखा कि मालेगांव विस्फोट मामले में सभी आरोपियों को बरी करना ‘सत्यमेव जयते’ के आदर्श का जीवंत प्रमाण है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे झूठे शब्द का इस्तेमाल किया. कांग्रेस ने सनातन धर्म और राष्ट्रसेवकों की छवि खराब की. उन्होंने मांग की कि कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिए. उनका कहना है कि यह पार्टी भारत और न्याय के खिलाफ रही है.
आगे सीएम योगी ने कांग्रेस से मांग की कि वह अपने ‘अक्षम्य पापो’ को स्वीकार करे और देशवासियों से माफी मांगे. उन्होंने कहा कि यह पार्टी वर्षों तक न्याय और धर्म के विरुद्ध काम करती रही है, और अब उसका चेहरा देश के सामने उजागर हो गया है.
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक जबरदस्त बम विस्फोट हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे. यह घटना देशभर में सनसनी फैलाने वाली थी और इसके बाद राजनीति से लेकर धार्मिक संगठनों तक में उथल-पुथल मच गई थी. जांच एजेंसियों के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित पर आरोप था कि उन्होंने आरडीएक्स जम्मू-कश्मीर से लाकर अपने घर में छिपाया और बाद में यह विस्फोटक देवलाली छावनी में स्थित सुधाकर चतुर्वेदी के निवास स्थान पर बम बनाने के लिए प्रयोग किया गया. माना जाता है कि बाइक पर बम लगाने का काम प्रीवण टक्कलकी, रामजी कालसांगरा और संदीप डांगे ने किया था. ये सभी एक बड़े साजिश का हिस्सा बताए गए थे.
इस केस में पहली चार्जशीट 2009 में दाखिल की गई थी, जिसमें कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया और 3 को फरार बताया गया. जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पेश किए गए, जैसे कि सुधाकर धर द्विवेदी के लैपटॉप से निकाली गई रिकॉर्डिंग और वॉयस सैंपल. जांच में यह भी सामने आया था कि जनवरी 2008 में फरीदाबाद, भोपाल और नासिक में कई गुप्त बैठकें हुई थीं, जिनमें इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम देने की रणनीति तैयार की गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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