कभी-कभी इतिहास किसी बड़ी घटना से नहीं, बल्कि किसी एक इंसान के हौसले से बदल जाता है. 23 मई 1984 भी ऐसी ही एक तारीख है, जब भारत की बेटी बछेंद्री पाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (29,032 फीट) पर पहुंचकर तिरंगा फहरा दिया था. इस उपलब्धि के साथ वे भारत की पहली महिला बन गईं, जिन्होंने एवरेस्ट को सफलतापूर्वक फतह किया.
बछेंद्री पाल का जन्म उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के छोटे से गांव नाकुरी में हुआ था. परिवार साधारण था और पिता सेना में कार्यरत थे. बचपन पहाड़ों के बीच बीता, इसलिए ऊंचाइयों से उनका रिश्ता बचपन से ही जुड़ गया था. हैरानी की बात ये है कि महज 12 साल की उम्र में उन्होंने बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लगभग 13,000 फीट ऊंचाई तक चढ़ाई कर ली थी.
लेकिन जब उन्होंने पर्वतारोहण को करियर बनाने की बात कही, तो समाज ने उन्हें रोकने की कोशिश की. अक्सर यही कहा गया कि यह काम लड़कियों के लिए नहीं है. मगर बछेंद्री पाल ने इन बातों को अपने सपनों के आगे टिकने नहीं दिया.
उन्होंने आगे चलकर उत्तरकाशी के नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से प्रशिक्षण लिया. यहीं से उनके सपनों को एक ठोस दिशा मिली. कठिन ट्रेनिंग, कड़े नियम और लगातार खुद को साबित करने की चुनौती—इन सबके बीच उन्होंने अपनी पहचान बनाई.
1984 में उन्हें भारतीय महिला एवरेस्ट अभियान का हिस्सा चुना गया. यह मौका उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
एवरेस्ट की चढ़ाई आसान नहीं थी. रास्ते में मौसम ने कई बार साथ छोड़ दिया. बेस कैंप के पास हुए एक भयानक हिमस्खलन ने पूरी टीम को झकझोर दिया था. कई लोग वापस लौटने पर मजबूर हो गए. इस हादसे में बछेंद्री पाल भी घायल हुईं, लेकिन उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया.
उनका हौसला इस एक सोच से और मजबूत हुआ कि अगर वे रुक गईं, तो यह सिर्फ उनका नहीं बल्कि कई भारतीय महिलाओं के सपनों का अंत होगा.
23 मई 1984 की सुबह करीब 1:07 बजे बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा. वहां पहुंचकर उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराया और भारत का नाम दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर पर दर्ज कर दिया. इस सफलता ने भारत की कई लड़कियों के लिए रास्ता खोल दिया. इसके बाद कई भारतीय महिला पर्वतारोहियों ने भी एवरेस्ट समेत कई चोटियों को फतह किया.
आज बछेंद्री पाल सिर्फ एक पर्वतारोही नहीं, बल्कि हिम्मत, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल हैं. उनकी कहानी यह सिखाती है कि सपने बड़े हों या छोटे, अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी ऊंचाई दूर नहीं रहती.
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-भारत एक्सप्रेस
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