विशेष

नेहरू और शास्त्री के निधन के बाद संभाली कमान, जानें 26 दिनों तक देश चलाने वाले गुलजारीलाल नंदा की कहानी

भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्हें भले ही बहुत लंबे समय तक सत्ता की कुर्सी पर बैठने का मौका न मिला हो, लेकिन उनकी ईमानदारी और योगदान हमेशा याद रखे जाते हैं. ऐसा ही एक नाम है गुलजारीलाल नंदा का, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश सेवा, श्रमिक अधिकारों और सादगी के लिए समर्पित कर दिया.

गुलजारीलाल नंदा का जन्म 4 जुलाई 1898 को पंजाब के सियालकोट (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था. उनका परिवार साधारण था, लेकिन पढ़ाई को लेकर हमेशा गंभीरता रही. उन्होंने लाहौर और आगरा में शिक्षा हासिल की और आगे चलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई पूरी की. युवावस्था से ही वे श्रमिकों की समस्याओं को लेकर काफी संवेदनशील थे और इसी दिशा में उन्होंने शोध भी किया.

आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका

1921 में वे महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से जुड़े और स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बन गए. इसके बाद उन्होंने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन में लंबे समय तक काम किया, जहां वे मजदूरों के हक और उनकी स्थिति सुधारने के लिए लगातार प्रयास करते रहे. ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

सरकार और संगठन में अहम जिम्मेदारियां

आज़ादी के बाद नंदा ने सरकार में कई महत्वपूर्ण पद संभाले. वे योजना आयोग से जुड़े रहे और बाद में श्रम, रोजगार, सिंचाई, विद्युत और गृह मंत्रालय जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली. वे भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे. भारत की ओर से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भी हिस्सा लिया, जो उनकी वैश्विक पहचान को दर्शाता है.

दो बार बने कार्यवाहक प्रधानमंत्री

देश के इतिहास में सबसे संवेदनशील मौकों पर नंदा को बड़ी जिम्मेदारी मिली. पहले 1964 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद और फिर 1966 में लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया. दोनों ही बार उनका कार्यकाल सिर्फ 13-13 दिनों का रहा, लेकिन उन्होंने संक्रमण काल में सरकार को स्थिर बनाए रखा.

1970-71 में उन्होंने रेल मंत्री के रूप में भी काम किया. लंबे सार्वजनिक जीवन के बाद 1997 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 15 जनवरी 1998 को 99 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया.

ये भी पढ़ें- भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को नई उड़ान: प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के साणंद में CG Semi OSAT सुविधा का किया उद्घाटन

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

पाकिस्तान के जंग का ख्वाब! शहबाज शरीफ ने UN में दी भारत को धमकी, अगले पल हुई हंसाई

Shehbaz Sharif War Threat to India: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने UNGA में भारत…

4 minutes ago

Indian Railways E-Pass: अब HHT से होगी रेलवे कर्मचारियों के ई-पास की डिजिटल जांच, फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

Indian Railways E-Pass: रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों के ई-पास की जांच अब Hand Held…

27 minutes ago

दूसरों के घरों में बर्तन मांझकर की पढ़ाई, फिर कैसे बने ‘विद्यासागर’? जानिए इस महान समाज सुधारक की दास्तान

Ishwar Chandra Vidyasagar Biography: ईश्वरचंद्र विद्यासागर भारत के महान समाज सुधारक, शिक्षाविद और दया के…

46 minutes ago

Kerala Wellness Tourism: रूस समेत विदेशी पर्यटकों में बढ़ा आयुर्वेद, योग और वेलनेस का क्रेज; जानिए क्यों बना केरल पसंदीदा डेस्टिनेशन

 Kerala Wellness Tourism: केरल में आयुर्वेद, योग, मेडिटेशन और प्राकृतिक वातावरण के कारण वेलनेस टूरिज्म…

57 minutes ago