भारत में योग और राजनीति का रिश्ता आज भले ही अलग-अलग नजर आए, लेकिन इतिहास में ऐसे कई दौर रहे हैं जब आध्यात्मिक दुनिया के प्रभावशाली लोगों की पहुंच सीधे सत्ता के केंद्र तक रही. स्वामी धीरेन्द्र ब्रह्मचारी का नाम इसी कहानी का सबसे दिलचस्प और रहस्यमय अध्याय माना जाता है. वे सिर्फ योग गुरु नहीं थे. उनका जीवन सत्ता, राजनीति, प्रभाव, आलीशान जीवनशैली और विवादों से भी जुड़ा रहा.
स्वामी धीरेन्द्र ब्रह्मचारी का जन्म 12 फरवरी 1924 को बिहार के मधुबनी में धीरेन्द्र चौधरी के रूप में हुआ था. कहा जाता है कि महज 13 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और लखनऊ पहुंच गए. यहीं उन्होंने महर्षि कार्तिकेय के मार्गदर्शन में योग की शिक्षा ली.
कई साल तक योग साधना और प्रशिक्षण के बाद वे 1958 में दिल्ली आए. अगले ही साल उन्होंने विश्वयातन योग आश्रम की स्थापना की. यही वह दौर था जब एक योग शिक्षक के रूप में उनकी पहचान तेजी से बनने लगी. लेकिन आगे चलकर उनकी पहचान सिर्फ योग तक सीमित नहीं रहने वाली थी.
धीरेन्द्र ब्रह्मचारी की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब कश्मीर में उनकी मुलाकात इंदिरा गांधी से हुई. धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी और वे इंदिरा गांधी के योग गुरु के तौर पर जाने जाने लगे.
1970 के दशक में उनकी राजनीतिक पहुंच और भी मजबूत होती गई. खासकर संजय गांधी के करीब आने के बाद दिल्ली के सत्ता गलियारों में उनका प्रभाव चर्चा का विषय बन गया. आपातकाल यानी 1975 से 1977 के दौर में तो उनके बारे में कई तरह की बातें सामने आती रहीं. कहा जाता था कि प्रधानमंत्री तक उनकी सीधी पहुंच थी और नेता तथा नौकरशाह भी उनकी बात को महत्व देते थे.
हालांकि, उनके प्रभाव को लेकर कई दावे और चर्चाएं रहीं, लेकिन कोई औपचारिक राजनीतिक पद उनके पास नहीं था. यही बात उनकी छवि को और रहस्यमय बनाती थी—वे सत्ता में नहीं थे, फिर भी सत्ता के बेहद करीब माने जाते थे.
धीरेन्द्र ब्रह्मचारी की शख्सियत का एक और पहलू लोगों को हैरान करता था. एक योग गुरु के तौर पर पहचाने जाने के बावजूद उनकी जीवनशैली काफी भव्य थी. उन्हें विमानों का शौक था और वे खुद विमान उड़ाते थे.
दिल्ली के अलावा हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में उन्होंने बड़े योग केंद्र विकसित किए. जम्मू-कश्मीर के मंटलाई स्थित उनके परिसर में अपनी हवाई पट्टी और विमान से जुड़ी सुविधाएं भी थीं. यही असाधारण जीवनशैली आगे चलकर विवादों का कारण बनी.
विमानों के आयात को लेकर जांच हुई. इसके अलावा जम्मू में उनकी बंदूक फैक्ट्री भी विवादों में आई. उन पर स्पेन से बंदूक के पुर्जे कथित तौर पर अवैध तरीके से मंगाने के आरोप लगे थे. इन घटनाओं ने उनकी छवि को एक साधारण योग गुरु से कहीं आगे पहुंचा दिया.
9 जून 1994 को धीरेन्द्र ब्रह्मचारी की जिंदगी का अचानक अंत हो गया. मंटलाई में उनका विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में स्वामी धीरेन्द्र ब्रह्मचारी और उनके पायलट दोनों की मौत हो गई.
उनकी मौत के बाद भी उनसे जुड़ी संपत्ति और संस्थानों को लेकर विवाद खत्म नहीं हुए. बल्कि समय के साथ उनकी सबसे चर्चित संपत्तियों में से एक फिर सुर्खियों में आ गई.
गुरुग्राम स्थित अपर्णा आश्रम उनकी विरासत का एक अहम हिस्सा रहा है. करीब 24 एकड़ में फैली इस संपत्ति को लेकर उनकी मृत्यु के बाद लंबे समय तक विवाद चलता रहा.
साल 2025 में हरियाणा विधानसभा ने अपर्णा आश्रम सोसाइटी के प्रबंधन और नियंत्रण को अपने हाथ में लेने से जुड़ा कानून पारित किया. इसके बाद मार्च 2026 में राज्य सरकार ने अधिग्रहण से संबंधित नियम भी अधिसूचित कर दिए.
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर लोगों का ध्यान उस व्यक्ति की ओर खींच दिया, जिसकी जिंदगी योग की साधना से शुरू हुई थी और जो आगे चलकर देश की सबसे ताकतवर राजनीतिक हस्तियों के बेहद करीब पहुंच गया.
इस सवाल का कोई एक आसान जवाब नहीं है. वे योग को लोकप्रिय बनाने वाले गुरु थे, लेकिन साथ ही उनकी राजनीतिक पहुंच ने उन्हें सत्ता के आसपास रहने वाला प्रभावशाली व्यक्ति भी बना दिया. उनकी संपत्ति, विमान, राजनीतिक संपर्क और विवादों ने उनकी कहानी को और पेचीदा बना दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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