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Sanjay Gandhi

स्वामी धीरेन्द्र ब्रह्मचारी सिर्फ एक योग गुरु नहीं थे, बल्कि उनकी पहुंच देश के सत्ता के गलियारों तक थी. इंदिरा गांधी और संजय गांधी के करीबी माने जाने वाले ब्रह्मचारी का जीवन योग, राजनीति, प्रभावशाली संपर्क, आलीशान जीवनशैली और विवादों से भरा रहा.

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 21 मार्च 1977 एक ऐसी तारीख है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. यह वही दिन था जब देश ने 21 महीनों तक चले आपातकाल के अंधेरे से बाहर निकलकर फिर से आज़ादी की सांस ली.

दिल्ली के तुर्कमान गेट पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने आपातकाल के दौर की उस भयावह घटना की याद ताज़ा कर दी, जब 18 अप्रैल 1976 को तोड़फोड़ और पुलिस फायरिंग में दर्जनों लोगों की जान गई थी.

20 दिसंबर 1978 को दो लोगों ने मिलकर Indian Airlines के Boeing 737 विमान को हाईजैक​ कर लिया था. इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में दोनों ने इस वारदात को अंजाम दिया था.

इमरजेंसी के दौरान पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित अमेरिकी पत्रकार लुईस एम. सिमंस को भारत से निर्वासित कर दिया गया था. उस जमाने में उन्होंने अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के लिए एक खबर लिखी थी, जिसमें बताया था कि एक पार्टी के दौरान संजय गांधी ने अपनी मां इंदिरा गांधी को थप्पड़ मार दिया था.

आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था. इसी दौरान इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने नसबंदी का एक विवादास्पद अभियान चला रखा था. उसी दौरान यह नारा काफी चर्चित हुआ था.

फिल्म ‘किस्सा कुसी का’ का निर्देशन अमृत नाहटा ने किया था. यह एक राजनीतिक व्यंग्य थी. फिल्म में शबाना आजमी, उत्पल दत्त, रेहाना सुल्तान, सुरेखा सीकरी और राज किरण प्रमुख भूमिकाओं में थे.

भाजपा सांसद मेनका गांधी कभी कॉलेज में होने वाले ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं. महज 17 साल की उम्र में उन्होंने पहला विज्ञापन किया था. एक शादी पार्टी में उनकी संजय गांधी से मुलाकात हुई थी.