Pakistan News: पाकिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा संकट गहरा गया है. शहबाज शरीफ सरकार ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के दबाव में खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में राष्ट्रपति शासन लगाकर पीटीआई (PTI) सरकार को बर्खास्त कर दिया है. जेल में बंद इमरान खान द्वारा देश छोड़ने के ऑफर को ठुकराने के बाद सेना की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. KPK में सरकार गिराने से भारत, अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और TTP के बाद अब पश्तून विद्रोह के रूप में पाकिस्तान के लिए 5वां मोर्चा खुल गया है, जिससे देश के विखंडन की आशंका गहरा गई है.
पाकिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा संकट गहरा गया है. शहबाज शरीफ सरकार ने सेना प्रमुख असीम मुनीर के इशारे पर इमरान खान के गढ़ खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में राष्ट्रपति शासन लगाकर पीटीआई (PTI) सरकार को बर्खास्त कर दिया है. जेल में बंद इमरान खान द्वारा देश छोड़ने के ऑफर को ठुकराने के बाद सेना की मुश्किलें बढ़ गई हैं. KPK में सरकार गिराने से भारत (ऑपरेशन सिंदूर), अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और TTP के बाद अब पश्तून विद्रोह के रूप में पाकिस्तान के लिए 5वां मोर्चा खुल गया है, जिससे देश के विखंडन और आंतरिक तबाही की आशंका बढ़ गई है.
पाकिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा हालात पूरी तरह बेकाबू होते नजर आ रहे हैं. शहबाज शरीफ सरकार ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के दबाव में खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में आपातकाल लगाते हुए इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर दिया है. केपीके में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है. सेना की तमाम कोशिशों के बावजूद यह क्षेत्र हमेशा से इमरान खान का मजबूत गढ़ रहा है, जिसे अब सीधे तौर पर रावलपिंडी और आईएसआई (ISI) के नियंत्रण में लाने की कोशिश की जा रही है.
इमरान खान ने विदेश भागने (यूरोप या सऊदी अरब जाने) के सेना के ऑफर को सिरे से खारिज करते हुए जेल में ही रहने का फैसला किया है, जो जनरल मुनीर के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बन चुका है. प्रांतीय सरकार को बर्खास्त करने से राज्य में राजनीतिक विकल्प पूरी तरह खत्म हो गए हैं. सेना ने टीटीपी (TTP) के आतंकवाद का ठीकरा प्रांतीय सरकार पर फोड़ा है, जबकि पिछले 25 वर्षों में पाक सेना के 16 से अधिक सैन्य अभियान यहां पूरी तरह विफल साबित हुए हैं.
केपीके ‘ग्रेटर पश्तूनिस्तान’ का अहम हिस्सा है, जहां पश्तूनों के बीच इमरान खान की भारी लोकप्रियता और अफगान तालिबान का नैतिक समर्थन प्राप्त है. सरकार गिराए जाने के बाद इस इलाके में भीषण हिंसा भड़कने और बलूचिस्तान की तरह गृहयुद्ध छिड़ने की पूरी आशंका है. यदि पश्तून कबीले इस्लामाबाद के खिलाफ बगावत पर उतर आए, तो पाकिस्तानी सेना के लिए इस अशांत इलाके को संभालना नामुमकिन हो जाएगा.
केपीके में आपातकाल लगाने से काबुल स्थित तालिबान सरकार के साथ पाकिस्तान के संबंध और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं. तालिबान कभी भी डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता और तोर्खम से स्पिन बोल्डक तक लगातार सैन्य झड़पें हो रही हैं. टीटीपी को निशाना बनाने के नाम पर अफगान इलाकों में बमबारी करके मुनीर ने उस देश को भी पूरी तरह अपना दुश्मन बना लिया है जिसे पाकिस्तान कभी अपनी ‘रणनीतिक गहराई’ (Strategic Depth) मानता था.
भारत द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कारण पाकिस्तान का पूर्वी मोर्चा पहले से ही भारी दबाव में है. एक तरफ भारत से बढ़ता खतरा, दूसरी तरफ तालिबान से बिगड़ते संबंध, तीसरी तरफ बलूचिस्तान में जारी भीषण सशस्त्र विद्रोह और चौथी तरफ टीटीपी का आतंक- इन चार मोर्चों पर जूझ रहे पाकिस्तान के लिए केपीके का नया संकट 5वां मोर्चा बन चुका है. सिंधु नदी के पश्चिम में सुरक्षा स्थिति पूरी तरह धराशायी होने की ओर अग्रसर है.
-भारत एक्सप्रेस
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