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बाली की डरावनी तस्वीर, जहां कभी फिजाओं में खुशबू थी, अब वहाँ बदबू और चूहों का राज है, हर दिन निकल रहा 3,400 टन कचरा

Bali Garbage Crisis: इंडोनेशिया के मशहूर पर्यटन स्थल बाली में कचरे का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है. कभी पर्यटकों से गुलजार रहने वाला यह द्वीप अब कूड़े के ढेर से जूझ रहा है. जगह-जगह फैले कचरे से बदबू, चूहों की बढ़ती संख्या और उसे जलाने से उठने वाला जहरीला धुआं लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पर्यटकों की संख्या में भी गिरावट आने लगी है और दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही कम हो रही है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ते पर्यटन ने भी इस संकट को गहरा किया है. पिछले साल बाली में करीब 70 लाख पर्यटक पहुंचे, जो वहां की 44 लाख की स्थानीय आबादी से कहीं ज्यादा हैं. इससे कचरे का दबाव और बढ़ गया है.
स्थिति से नाराज होकर 16 अप्रैल को सैकड़ों सफाई कर्मचारियों ने कचरे से भरे ट्रकों के साथ गवर्नर कार्यालय तक मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि कचरा इकट्ठा करने के बाद उसके निपटान की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.

34 वर्षीय स्थानीय दुकानदार युविता ने न्यूज एजेंसी AFP से बातचीत में बताया कि कचरा अब उनके व्यवसाय पर सीधा असर डाल रहा है. उन्होंने अपनी दुकान के आसपास सफाई के लिए एक निजी कंपनी को नियुक्त किया है और इसके लिए अपनी कमाई से पैसा खर्च कर रही हैं. उनका कहना है कि बदबू के कारण कई ग्राहक बिना खरीदारी किए ही लौट जाते हैं.

बाली में हर दिन निकल रहा 3,400 टन कचरा

रिपोर्ट के मुताबिक, बाली में हर दिन करीब 3,400 टन कचरा निकलता है. अकेले युविता की दुकान से रोजाना चार बड़े बैग भरकर कचरा निकलता है, जिसमें ज्यादातर जैविक कचरा जैसे पत्ते और फूल शामिल होते हैं.
हालांकि इंडोनेशिया ने 2013 में खुले में कचरा फेंकने पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब प्रशासन इसे सख्ती से लागू करने की कोशिश कर रहा है.

खुले में कचरा फेंकने पर करोड़ों का जुर्माना

बाली की पब्लिक ऑर्डर एजेंसी के प्रमुख आई देवा न्योमन राय धर्मादी के अनुसार, खुले में कचरा फेंकने या जलाने पर तीन महीने तक की जेल और करीब 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

बाली का प्रसिद्ध कूटा बीच भी इस समस्या से अछूता नहीं है. यहां समुद्र के साथ बहकर आने वाला प्लास्टिक कचरा बड़ी मात्रा में जमा हो जाता है. रोजाना कचरे के बैग पार्किंग इलाकों में ढेर के रूप में इकट्ठा हो जाते हैं.
ऑस्ट्रेलिया से आए पर्यटक जस्टिन बुचर ने कहा कि रात के समय यहां चूहों की भरमार रहती है और बदबू भी काफी ज्यादा होती है, जिससे पूरा माहौल खराब लगता है.

बाली की सबसे बड़ी लैंडफिल साइट बंद

इस समस्या के पीछे एक बड़ी वजह बाली की सबसे बड़ी लैंडफिल साइट का बंद होना भी है, जिसके चलते कचरा सड़कों पर जमा हो रहा है. प्रशासन ने अस्थायी राहत के तौर पर जुलाई के अंत तक सुवांग क्षेत्र में सीमित मात्रा में कचरा फेंकने की अनुमति देने की बात कही है, लेकिन अगस्त से देशभर में ओपन लैंडफिल साइट्स बंद करने की योजना है.

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पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इंडोनेशिया की 28.4 करोड़ की आबादी हर साल 4 करोड़ टन से ज्यादा कचरा पैदा करती है. इसमें करीब 40% खाद्य अपशिष्ट और लगभग 20% प्लास्टिक कचरा होता है, लेकिन कुल कचरे का केवल एक-तिहाई ही रिसाइकल हो पाता है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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