बांग्लादेश में तारिक रहमान की नई सरकार बनते ही एक चौंकाने वाला फैसला सामने आया है. बीएनपी ने अपनी कैबिनेट में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सबसे पावरफुल मंत्री खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री बनाया है. खलीलुर यूनुस सरकार में गृह और रक्षा मंत्री थे और उन्हें यूनुस का दायां हाथ माना जाता था. ये वही खलील हैं जिनके कार्यकाल के दौरान ही भारत के साथ रिश्ते बड़े तनावपूर्ण रहे. साथ ही बता दें कि यह एकमात्र ऐसा नाम है जो यूनुस कैबिनेट से तारिक कैबिनेट में भी जगह बना पाया है. अब सवाल उठ रहा है कि तारिक ने खलीलुर को अपनी कैबिनेट में क्यों शामिल किया है.
दरअसल खलीलुर रहमान यूनुस सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्री थे. उन्हें गृह और रक्षा जैसे अहम विभाग सौंपे गए थे. यूनुस सरकार में शामिल होने से पहले खलीलुर विदेश सेवा में तैनात थे. ढाका में जन्मे खलीलुर ने शुरुआती पढ़ाई ढाका यूनिवर्सिटी से की. इसके बाद टफ्ट्स और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई की. 1991 में जब खालिदा जिया की सरकार बनी, तब खलीलुर यूएन में तैनात थे. उसी दौरान वे खालिदा जिया के करीब आए. यूनुस सरकार में भी खलीलुर बीएनपी की सिफारिश पर ही शामिल हुए थे. यूनुस सरकार के आखिरी समय में भारत से संबंध सुधारने की कवायद खलीलुर ने ही की थी. दिसंबर 2025 में वे नई दिल्ली आए थे और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल से मुलाकात की थी.
तारिक रहमान ने खलीलुर को विदेश मंत्री बनाने का फैसला कई रणनीतिक कारणों से लिया हो सकता है, चलिए इसके कारणों को डिकोड कर लेते हैं:
सबसे पहला कारण चीन और पाकिस्तान से संबंध– दरअसल यूनुस सरकार में खलीलुर की वजह से ही चीन और पाकिस्तान से संपर्क बढ़ा था. तारिक के लिए भी ये दोनों देश अहम हैं, क्योंकि उन्होंने हाल ही में सभी पड़ोसी देशों के साथ एक जैसे संबंध बनाने की घोषणा की थी.
दूसरा बड़ा कारण सेना प्रमुख वकार जमान– खलीलुर को वकार जमान का धुर विरोधी माना जाता है. तारिक के लिए सेना को कंट्रोल करना बड़ी चुनौती है, क्योंकि सेना में उनका कोई भरोसेमंद अफसर नहीं है. तारिक खुद 17 साल ब्रिटेन में रहे हैं. खलीलुर की नियुक्ति सेना पर कंट्रोल बढ़ाने की कोशिश मानी जा रही है.
तीसरा कारण रोहिंग्या मुद्दा- बांग्लादेश के लिए रोहिंग्या को वापस भेजना बड़ी चुनौती है. यूनुस सरकार में रोहिंग्या को वापस भेजने के लिए खलीलुर लगातार प्लान तैयार कर रहे थे.
चौथा कारण भारत से संबंध- यूनुस सरकार के आखिरी समय में भारत से संबंध ठीक करने की कवायद खलीलुर ने ही की थी. तारिक भी भारत से संबंध बेहतर रखना चाहते हैं.
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बता दें कि यह फैसला तारिक रहमान की सियासी चालाकी दिखाता है. खलीलुर की नियुक्ति से तारिक ने यूनुस समर्थकों को साधने की कोशिश की है. साथ ही सेना पर कंट्रोल, रोहिंग्या मुद्दे पर रणनीति और भारत-चीन-पाकिस्तान के साथ संतुलित रिश्तों की नीति को मजबूत करने की कोशिश है. यह नियुक्ति बांग्लादेश की नई सरकार के लिए एक संतुलित और रणनीतिक कदम माना जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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