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Bangladesh Politics

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना तख्तापलट के दो साल बाद पहली बार दिल्ली में मीडिया से वर्चुअली जुड़ेंगी. 5 अगस्त को होने वाले इस कार्यक्रम में वह बांग्लादेश वापसी के प्लान पर बात करेंगी.

तारिक रहमान सरकार ने यूनुस कैबिनेट के प्रभावशाली मंत्री खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री बनाकर सबको चौंका दिया. चीन-पाकिस्तान, सेना संतुलन और भारत संबंधों को लेकर इसे बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है...

हिंदू जिन्होंने बहुसंख्यक पड़ोसियों को अपना परिवार माना. वही हिंदू आज Bangladesh में जघन्य तरीके से जलाए जा रहे हैं.

भारत के विदेश मंत्री एस-जयशंकर खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बांग्लादेश पहुंचे हैं. वैसे तो एस जयशंकर का ये विजिट सांत्वना के लिए औपचारिक है, लेकिन चुनाव के बीच खालिदा जिया के लिए इस समय में एस जयशंकर का ढाका जाना कई मायनों में अहम माना जा रहा है. जयशंकर ऐसे समय में ढाका जा रहे हैं, जब बांग्लादेश और भारत के बीच रिश्तों की कड़वाहट चरम पर है. पिछले एक महीने में दोनों देशों ने एक दूसरे के राजदूत को 2-2 बार तलब किया गया है.

बांग्लादेश में तारिक रहमान की एंट्री ने शेख हसीना की टेंशन बढ़ा दी है. वहीं इससे पहले मोहम्मद यूनुस और उनकी टीम से उलझ रही आवामी लीग के लिए इसे एक और बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि तारिक की पार्टी बीएनपी बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी है और आने वाले चुनाव में तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है. ऐसे में तारिक की ढाका वापसी ऐसे वक्त में हुई है, जब चुनाव के बीच शेख हसीना और उनकी पार्टी को फिर से सियासी मैदान में उतरने की उम्मीद जगी थी.

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मिली मौत की सजा पर उनके बेटे सजीब वाजेद ने इसे पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है.

बांग्लादेश में अगले साल होने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है. सात इस्लामिक राजनीतिक दलों ने ढाका में मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया.

Awami League Protest Against Yunus: दर्जनों युवा बैनर लिए 'जय बांग्ला, जय बंगबंधु', 'शेख हसीना आएंगी, हाईवे हिल जाएगा', 'शेख हसीना आएंगी, बांग्लादेश हंसेगा' जैसे नारे लगाते हुए जुलूस में शामिल हुए.

संविधान पीठ की सुनवाई के दौरान सीजेआई बी आर गवई ने अपने संविधान पर गर्व जताते हुए नेपाल और बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता का उदाहरण दिया. राज्यपालों द्वारा बिल पास करने के मामले में समय सीमा पर चर्चा हुई.

Bangladesh: प्रदर्शनकारी छात्रों ने कैंपस की विभिन्न सड़कों पर मार्च किया और नारे लगाए “वन टू थ्री फोर, हॉल पॉलिटिक्स नो मोर” तथा “हॉल पॉलिटिक्स चलबे ना चलबे ना” (हॉल राजनीति नहीं चलेगी). कुछ छात्रों ने छात्रावास के गेटों के ताले तोड़कर प्रदर्शन में शामिल हुए.