लंदन के सेंट जेम्स कोर्ट, ताज होटल में सेंटर फॉर इंटरनेशनल लीगल स्टडीज (CILS) ने एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा का आयोजन किया.इस चर्चा का विषय था, “मध्यस्थ, धोखाधड़ी की चिंताएं और अदालतें: जब धोखाधड़ी/भ्रष्टाचार का संदेह हो (लेकिन दावा न किया गया हो), तो मध्यस्थों को क्या करना चाहिए और अदालतें कैसे मदद या रोकथाम कर सकती हैं?” इस आयोजन में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई (CJI BR Gavai), जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जे.के. महेश्वरी सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया.
जस्टिस बी.आर. गवई ने अपने भाषण में मध्यस्थता की बढ़ती लोकप्रियता पर प्रकाश डाला, खासकर वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने में. उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया में अखंडता बनाए रखना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से जब सार्वजनिक धन दांव पर हो. उन्होंने बताया कि जब धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार का संदेह होता है, लेकिन इसे औपचारिक रूप से दावा नहीं किया जाता, तो मध्यस्थों के सामने एक जटिल नैतिक और कानूनी चुनौती आती है. भारतीय अदालतों का ऐतिहासिक दृष्टिकोण सतर्क रहा है, जैसा कि 1962 के अब्दुल कादिर शमसुद्दीन बुबेरे बनाम माधव प्रभाकर ओक मामले में देखा गया, जहां धोखाधड़ी के आरोपों को अदालतों में खुले ट्रायल की आवश्यकता के आधार पर मध्यस्थता से रोका गया था.
जस्टिस गवई (CJI BR Gavai) ने भारतीय न्यायिक प्रणाली में बदलाव का उल्लेख किया. 2010 के एन. राधाकृष्णन बनाम मेस्ट्रो इंजीनियर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जटिल धोखाधड़ी के दावों को सिविल कोर्ट के लिए उपयुक्त माना था, लेकिन बाद में इस फैसले की आलोचना हुई. 2014 के वर्ल्ड स्पोर्ट ग्रुप बनाम एमएसएम सैटेलाइट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता खंड की स्वतंत्रता को रेखांकित किया. 2016 के ए. अय्यास्वामी बनाम ए. परमसिवम मामले में “साधारण धोखाधड़ी” और “गंभीर धोखाधड़ी” के बीच अंतर स्थापित किया गया, जिसे 2020 के अवितेल पोस्ट स्टूडियोज बनाम एचएसबीसी मामले में और स्पष्ट किया गया.
यह भी पढ़ें- LCIA International Arbitration Symposium: भारत की बढ़ती भूमिका पर लंदन में चर्चा, CJI जस्टिस बी.आर. गवई ने दिए जवाब
जस्टिस गवई (CJI BR Gavai) ने 2024 के अंतरराष्ट्रीय चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें मध्यस्थों के लिए धोखाधड़ी के संकेतों (रेड फ्लैग्स) की पहचान, सत्यापन और कानूनी प्रासंगिकता का आकलन करने की तीन-चरणीय पद्धति दी गई है. मध्यस्थों को निष्पक्षता बनाए रखते हुए प्रक्रियात्मक कदम उठाने की सलाह दी गई, जैसे तथ्य-खोज, विशेषज्ञ विश्लेषण और समानांतर,सार्वजनिक धन से संबंधित विवादों में मध्यस्थों और अदालतों को सार्वजनिक विश्वास के संरक्षक के रूप में कार्य करना चाहिए.
पैनल में जस्टिस गवई के साथ-साथ मध्यस्थता विशेषज्ञ स्टीवन पी. फिनिजियो (विल्मर हेल), जेनेवीव पोइरियर (पार्टनर, लालिव), सिद्धार्थ धरमधिकारी (अतिरिक्त महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश) और अभिकल्प प्रताप सिंह (मेघालय के स्टैंडिंग काउंसिल) शामिल थे. यह आयोजन मॉडरेटर अभिकल्प प्रताप सिंह की देखरेख में हुआ और इसे विशेष रूप से आमंत्रण द्वारा आयोजित किया गया था.
यह पैनल चर्चा मध्यस्थता में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जिसमें वैश्विक और भारतीय परिप्रेक्ष्य से गहन विचार-विमर्श हुआ.
नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने करियर की शुरुआत ‘स्ट्रोकलेस वंडर’ की छवि के साथ की…
Dussehra 2026: दिल्ली के दशहरा समारोह में पीएम मोदी ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं…
Jaanta Raja Ghaziabad 2026: गाजियाबाद के सनसिटी में 22 से 28 अक्टूबर तक 'जाणता राजा'…
UP News: गोरखपुर में विजयदशमी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को बांटने…
Child Death News: लखीमपुर खीरी के फरधान थाना क्षेत्र के रुकंदीपुर गांव में लापता पांच…
Amit Shah Punjab Visit: पंजाब दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशे…