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मौत की इमारत बना इंडोनेशिया का यह स्कूल, ढहने से 3 लोगों की मौत, 91 लोग फंसे, 26 को अस्पताल में कराया गया भर्ती

Indonesia School Building Collapse:  इंडोनेशिया के सिदोअर्जो में स्कूल की इमारत ढहने के के बाद हालातों को लेकर ताजा जानकारी सामने आई है. इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बुधवार को बताया कि पूर्वी जावा प्रांत के सिदोअर्जो जिले में हुए इस हादसे में स्कूली छात्र समेत करीब 91 लोग मलबे में फंस गए. इस घटना में अबतक तीन लोगों की मौत हो गई.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (बीएनपीबी) के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने बताया कि मंगलवार शाम तक इस दुर्घटना में 90 से ज्यादा लोग घायल हो गए, जिनमें से तीन की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि 26 लोगों का अभी अस्पताल में इलाज जारी है. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे में लोगों को निकालने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के सैकड़ों बचावकर्मियों को घटनास्थल पर तैनात किया गया है. हालांकि, रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. सभी बचावकर्मी हाथ के इस्तेमाल से ही मलबे को हटाने की कोशिश कर रहे हैं.

मलबे में फंसे लोगों को पहुंचाया जा रहा भोजन-पानी

दरअसल, मलबे के नीचे कई लोग दबे हुए हैं. ऐसे में अगर भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया, तो संभव है कि मलबे में दबे लोगों को इससे नुकसान पहुंचे. वहीं मलबे में फंसे लोगों तक भोजन और पानी के साथ ही ऑक्सीजन पहुंचाया जा रहा है.

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मलबे में दबे कुछ लोगों के जीवित होने की उम्मीद

घटना के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे एक बचावकर्मी ने बताया कि ढही हुई इमारत के मलबे में दबे कुछ लोगों के जीवित होने की उम्मीद है. ऐसे में उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है.

इस बीच, बीएनपीबी निर्माण विशेषज्ञों के साथ मिलकर मलबा हटाने की योजना तैयार कर रहा है. इससे बाद में लोगों को बाहर निकालने में आसानी होगी और जरूरत पड़ने पर बाद के चरणों में भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा सकेगा.

मलबे में फंसे स्कूली छात्रों में ज्यादातर बच्चे 12 से 17 साल के बीच के बताए जा रहे हैं. हादसे के बाद नोटिस बोर्ड पर दी गई जानकारी के अनुसार करीब 65 छात्रों का कुछ पता नहीं चल पाया था. वहीं हादसे के बाद से छात्रों के परिजनों का बुरा हाल हो रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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