मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) का सैन्य तनाव अब भी खतरनाक मोड़ पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वहां अपनी शक्तिशाली नौसेना का कड़ा पहरा लगाया, नाकेबंदी के बावजूद, ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) में खतरनाक समुद्री बारूदी सुरंगें (Naval Mines) तैनात कर दी हैं. हाल ही में सामने आई कुछ विशेष सैटेलाइट और खुफिया तस्वीरों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने इस समुद्री रास्ते में किस तरह बारूद का जाल बिछा रखा है, जिसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और ट्रंप की सेना अब तक पूरी तरह लोकेट या ढूंढ नहीं पा रही थीं.
रणनीतिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी दुनिया के लिए एक जीवन रेखा की तरह है. दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद से यह पूरा इलाका युद्ध के मैदान में बदल गया है. इसके जवाब में ईरान ने इस जलमार्ग को बंद करने की घोषणा की थी. अब इस रास्ते में बारूदी माइंस की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ गई है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई भी बड़ा तेल टैंकर इन माइंस की चपेट में आता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आ सकता है.
ट्रंप की चेतावनी और बेअसर होती नाकेबंदी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी थी कि वह होर्मुज के रास्ते को तुरंत बिना किसी शर्त और टैक्स के पूरी तरह खोले और वहां बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों को हटाए. अमेरिकी नौसेना ने इस रूट को सुरक्षित करने के लिए ‘ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम’ भी शुरू किया है, जिसके तहत व्यापारिक जहाजों को अमेरिकी युद्धपोतों की देखरेख में निकाला जा रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार दावे किए थे कि उनकी नौसेना ने ईरान की घेराबंदी कर दी है. हालांकि, ओमान के पास जास्क द्वीप और ओमान प्रायद्वीप के उत्तर में ईरान द्वारा तैनात की गई इन घातक माइंस की नई तस्वीरों ने अमेरिकी दावों की पोल खोल दी है और यह साबित कर दिया है कि ईरान की नौसैनिक तैयारी ट्रंप प्रशासन की सोच से कहीं अधिक मजबूत है.
यह बारूदी संकट ऐसे समय में गहराया है जब व्हाइट हाउस में दोनों देशों के बीच सीजफायर (युद्धविराम) को लेकर उच्च स्तरीय बैठकें चल रही हैं. राष्ट्रपति ट्रंप इस बात पर अड़े हैं कि ईरान के साथ किसी भी समझौते की पहली शर्त होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह से सुरक्षित खोलना और परमाणु सामग्री को नष्ट करना होगी. वहीं दूसरी तरफ, ईरानी संसद और सैन्य नेतृत्व का कहना है कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे. ईरान का साफ मानना है कि बातचीत से नहीं बल्कि मिसाइलों और रक्षा तैयारियों के दम पर ही अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सकता है. इस बारूदी तनाव के कारण समुद्री परिवहन कंपनियों ने फिलहाल इस रूट से अपने जहाजों को भेजने से परहेज करना शुरू कर दिया है.
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