ट्रंप टैरिफ पर कोर्ट में सुनवाई
US Court On Donald Trump Tariff: दुनिया पर एकतरफा टैरिफ लगाकर ‘टैरिफ किंग’ बनने की कोशिश करने वाले ट्रंप को अब उनके अपने ही देश की अदालत से करारा झटका लगा है. एक अमेरिकी संघीय अपील अदालत ने उनके वैश्विक टैरिफ को अवैध (Donald Trump Global tariffs illegal) करार देते हुए कहा है कि ट्रंप को हर देश पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ही महीने में जापान और चीन (PM Modi China visit) का दौरा करके अपनी विदेश नीति की धाक जमा रहे हैं.
अमेरिकी संघीय अपील कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दुनिया के हर देश पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने इन टैरिफ को फिलहाल लागू रहने दिया है, ताकि ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके. यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका (US court ruling on Donald Trump Tariff) है.
अमेरिकी अपील कोर्ट के इस फैसले (US court ruling on Donald Trump Tariff) से ट्रंप के टैरिफ के फैसले को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत अपने अधिकारों का दायरा पार कर दिया था. यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ी कानूनी हार है, जो न्यूयॉर्क के एक स्पेशल फेडरल ट्रेड कोर्ट के मई महीने में दिए फैसले को पुष्टि करता है.
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संघीय अपील कोर्ट ने शुक्रवार को 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया है. कोर्ट ने फैसले में लिखा कि यह कहीं से संभव नहीं लगता कि कांग्रेस की मनसा राष्ट्रपति को सीमित अधिकार देने का था, जिससे वह दुनिया के किसी भी देश पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगा सकें.
अमेरिकी अदालत ने उन टैरिफ पर फैसला सुनाया है, जो डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल महीने में सभी साझेदार देशों पर लगाए थे. इसमें उन टैरिफ को शामिल किया गया है जो अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले चीन, मैक्सिको और कनाडा पर लागू किए थे. ट्रंप ने तर्क दिया था कि कई साझेदार देशों से अमेरिका को व्यापारिक घाटा हो रहा है.
सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि अगर ट्रंप के टैरिफ को रद्द किया जाता है, तो उसे इंपोर्ट टैक्स से वसूल किए गए कुछ पैसों को वापस (Donald Trump Tariffs Impact On US Treasury) करना पड़ सकता है, जिससे अमेरिका के खजाने को एक बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है. अगर ऐसा होता है, तो आगे चलकर यह ट्रंप की टैरिफ लगाने की कोशिशों को भी कमजोर कर सकता है.
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अगर ट्रंप के टैरिफ को रद्द किया जाता है, तो अमेरिका को अरबों रुपये का आर्थिक झटका लग सकता है. इससे अमेरिका के खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा और आगे चलकर यह ट्रंप की आर्थिक नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है. अमेरिकी कोर्ट का यह फैसला ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ वाले नारे की नींव हिलाता है. यह दर्शाता है कि कोई भी राष्ट्रपति अपनी आपातकालीन शक्तियों के नाम पर मनमाना फैसला नहीं ले सकता.
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