Meta Ends Fact Checking: मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने मंगलवार (7 जनवरी) को कंपनी की लंबे समय से चली आ रही फैक्ट चेक टीमों को हटाने के निर्णय की घोषणा की. इसकी जगह एक्स, जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था, के समान ‘कम्युनिटी नोट्स’ सिस्टम स्थापित करने का विकल्प चुना है. अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में जुकरबर्ग ने इस कदम को “फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आजाद अभिव्यक्ति की हमारी जड़ों पर वापस लौटने का समय” बताया.
जुकरबर्ग ने इंस्टाग्राम के माध्यम से अपने बयान में कहा,
“मैंने लोगों को आवाज देने के लिए सोशल मीडिया बनाना शुरू किया. मैं आज भी यही मानता हूं. हमने कंटेंट को मॉडरेट करने के लिए बहुत सारे जटिल सिस्टम बनाए हैं, लेकिन जटिल सिस्टम की समस्या यह है कि वे गलतियां करते हैं. भले ही वे गलती से महज 1% पोस्ट को सेंसर कर दें, लेकिन यह लाखों लोगों के लिए है. हम अब उस जगह पर पहुंच गए हैं जहां बहुत सारी गलतियां और बहुत अधिक सेंसरशिप है.”
रिपोर्ट के अनुसार, सेंसरशिप को वापस लाने के लिए मेटा फैक्ट चेकर्स (Meta Fact Checkers) से छुटकारा पा रहा है और उनकी जगह कम्युनिटी नोट्स ला रहा है. एक ऐसा प्रारूप जिसमें यूजर्स स्वयं उस कंटेंट को फ्लैग करते हैं जिसमें गलत सूचना हो सकती है. नई प्रणाली अगले दो महीनों में अमेरिका में शुरू हो जाएगी, और अगले एक साल में इसका विस्तार किया जाएगा.
इस कार्यान्वयन के हिस्से के रूप में मेटा के ऐप्स अब से किसी कंटेंट के हानिकारक होने की जांच करेंगे, खासकर तब जब उसके यूजर्स द्वारा इसकी रिपोर्ट की गई हो. आतंकवाद जैसे अपवादों को छोड़कर.
एक वरिष्ठ वकील ने नाम न बताने का अनुरोध करते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार “कानून और नीति को प्रभावित करने के लिए भारत के साथ अपने अनुकूल संबंधों का उपयोग कर सकती है, लेकिन यह कोई आसान उलटफेर या संशोधन नहीं होगा”.
नीतिगत बदलाव दुनिया भर में बिग टेक प्लेटफॉर्म के काम करने के तरीके को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है, साथ ही भारत में ऑल्ट न्यूज और बूम लाइव जैसे थर्ड-पार्टी फैक्ट चेकर्स के ऑपरेटिंग बिजनेस मॉडल को भी प्रभावित कर सकता है.
इस बीच, जुकरबर्ग ने जोर देकर कहा कि फैक्ट चेकर्स खुद ‘राजनीतिक रूप से पक्षपाती’ हैं, इस प्रकार वे सोशल मीडिया के लोकाचार के खिलाफ जा रहे हैं.
मेटा के इस निर्णय की नोबेल पुरस्कार विजेता पत्रकार मारिया रेसा ने आलोचना की है.
पत्रकार मारिया रेसा ने इस बात से पूरी तरह असहमति जताते हुए कहा,
“मार्क जुकरबर्ग कहते हैं कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा है, यह पूरी तरह से गलत है. केवल तभी आप ऐसा दावा कर सकते हैं जब आप लाभ-प्रेरित हों, केवल तभी जब आप सत्ता और पैसा चाहते हों. यह सुरक्षा के बारे में है.”
मारिया रेसा (Maria Ressa) ने फैक्ट चेकर को हटाने की आलोचना की और चेतावनी दी कि इससे “तथ्यों के बिना दुनिया” बन सकती है, जिसे उन्होंने “एक तानाशाह के लिए सही दुनिया” के रूप में वर्णित किया.
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप आधिकारिक तौर पर निवर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से कार्यभार संभालने वाले हैं. ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के अंत में मेटा के फैक्ट चेक और कंटेंट मॉडरेशन प्रयासों के निशाने पर रहे थे. मेटा ने 6 जनवरी, 2021 को एक भाषण में अपने समर्थकों को अमेरिकी सरकार की सीट पर धावा बोलने के लिए कथित तौर पर उकसाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को ब्लॉक कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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