दुनिया

चीन का नया ‘मच्छर ड्रोन’, साइंस फिक्शन जैसी है तकनीक, लेकिन असल में है बहुत खतरनाक

ड्रोन टेक्नोलॉजी ने पिछले कुछ सालों में जो प्रगति की है, वो किसी साइंस फिक्शन फिल्म से कम नहीं लगती. लेकिन अब चीन ने जो किया है, वो वाकई हैरान कर देने वाला है. चीन एक ऐसा माइक्रो ड्रोन बनाने की तैयारी में है, जो मच्छर से भी छोटा होगा. सोचिए, एक ऐसा ड्रोन जो आपकी आंखों से छिपा रह सके और आपकी बातचीत, मूवमेंट, यहां तक कि पासवर्ड तक चुरा ले.

हाल ही में चीन की सरकारी मीडिया ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वैज्ञानिक हाथ में एक बेहद छोटा, मच्छर जैसे दिखने वाला ड्रोन पकड़े नजर आए. ये कोई खिलौना नहीं, बल्कि चीन की अगली जासूसी तकनीक हो सकती है. दावा है कि ये माइक्रो ड्रोन सैन्य अभियानों के साथ-साथ उन मिशनों में भी काम आएंगे जहां बेहद गोपनीयता की जरूरत होती है.

इस तकनीक को लेकर दुनिया के कई सुरक्षा विशेषज्ञ चिंतित हैं. उनका कहना है कि इतने छोटे आकार का ड्रोन आसानी से किसी भी व्यक्ति या जगह तक पहुंच सकता है और वो भी बिना पकड़े गए.
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पासवर्ड से लेकर वायरस तक कई खतरे

अमेरिका में रक्षा मामलों के विशेषज्ञ टिमोथी हीथ ने चेतावनी दी है कि इस तरह के ड्रोन का इस्तेमाल निजी जानकारी चुराने के लिए किया जा सकता है जैसे आपका फोन पासवर्ड या बैंक डिटेल.

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जैविक हमलों का भी बन सकता है जरिया

वहीं गूगल के साथ काम कर चुकी टेक्नोलॉजिस्ट ट्रेसी फॉलोज ने इससे जुड़े एक और खतरे की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि ऐसे माइक्रो ड्रोन से खतरनाक केमिकल या वायरस भी ट्रांसपोर्ट किए जा सकते हैं. यानी बात सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक जैविक हमलों का जरिया भी बन सकती है.

पहचानना नामुमकिन, रोकना मुश्किल

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये ड्रोन मच्छर जैसे दिखते हैं और उतने ही छोटे होते हैं. ऐसे में किसी आम व्यक्ति के लिए इन्हें पहचानना लगभग नामुमकिन है. सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी इन्हें ट्रैक कर पाना आसान नहीं होगा. इस बात को लेकर दुनियाभर के साइबर और मिलिट्री एक्सपर्ट्स अब चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले समय में यह तकनीक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन सकती है. इसका इस्तेमाल सिर्फ चीन ही नहीं, कोई भी देश या संगठन कर सकता है.

– भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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