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500 से ज्यादा मौतें…सड़ती लाशें और वायरल होते वीडियो, नेपाल त्रासदी को लेकर अभी तक क्या-क्या पता चला?

Nepal Flood Tragedy Updates: बुधवार 26 अगस्त की सुबह नेपाल के उत्तरी सीमा पर मौजूद क्षेत्रों में अचानक आई भयानक बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई. तिब्बत से चले पानी के सैलाब ने भोटेकोशी नदी में आकर खतरनाक रूप ले लिया. जिसकी वजह से चीन-नेपाल सीमा पर मौजूद तिमुरे और स्याप्रुबेसी के आसपास के इलाके पूरी तरह से तबाह हो गए. इस बाढ़ के रास्ते में जो भी आया, चाहे वो पुल हो, सड़कें हो, इमारतें या इंफ्रास्ट्रक्चर, सबकुछ तबाह हो गया. कई पुल और घर तो त्रिशुला नदी में बह गए. बाढ़ ने अपने प्रचंड वेग से रसुवा को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया. कई इलाकों से संपर्क कट चुका है.

इस आपदा को आए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन आपदा अभी खत्म नहीं हुई है. वैज्ञानिक इस इलाके में ऐसी और आपदाओं के आने की बात कह रहे हैं. नेपाली सेना रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है. खोजी दल नदी के किनारे और निचले इलाकों में बसी बस्तियों की छानबीन कर रहे हैं. इन इलाकों से बड़ी संख्या में शव बरामद हो रहे हैं. सरकार का कहना है कि इस आपदा में अबतक 538 लोगों की जान जा चुकी है. जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं.

अनुमान लगाया जा रहा है कि हताहतों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, क्यंकि रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे जवानों को प्रभावित इलाकों से दूर लगातार शव बरामद हो रहे हैं. कई शव नदी के किनारों पर फंसे हुए मिले.

500 से ज्यादा लोगों की हो चुकी मौत

इस आपदा में शुक्रवार दोपहर तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकतर लोग रसुवा में अचानक आई बाढ़ में मारे गए थे. इनके शव निचले इलाकों में मिल रहे हैं. सरकारी अधिकारी लगातार स्थिति को मॉनिटर कर रहे हैं और शवों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं.

बता दें कि, भोटेकोशी नदी त्रिशुली नदी का ही हिस्सा है. भोटेकोशी नदी आगे चलकर त्रिशुला नदी में मिल जाती है. इसलिए रसुवा में आई ये त्रासदी अपने साथ लोगों और मलबे को निचले इलाकों तक बहा ले गई. शुरू में जब ये आपदा आई तब यह सिर्फ रसुवा में ही तबाही मचाई, लेकिन पानी की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि इसके साथ हजारों घर, लोग, इंफ्रास्ट्रक्चर सब बह गए.

मुर्दाघरों में नहीं है जगह

नेपाल में आई इस त्रासदी में अस्पतालों के हालात को भी उजागर कर दिया है. नेपाल के चितवन में अबतक 186 शव बरामद हो चुके हैं. लेकिन जिले के अस्पतालों के मौजूदा मुर्दाघरों में इतनी जगह ही नहीं है कि इन शवों को रखा जा सके. यहां केवल 30-50 शव एक बार में रखे जा सकते हैं.

ये भी पढ़ें- नेपाल में फिर बाढ़ का अलर्ट, धादिंग-नुवाकोट में रोका गया सर्च ऑपरेशन

इन शवों को रखने के लिए जिला प्रशासन ने औद्योगिक इमारतों को एक अस्थाई मुर्दाघर में बदल दिया है. यहां लगभग 250 शव रखे जा सकते हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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