Pakistan History Claim: पाकिस्तान के पूर्व कार्यवाहक (केयरटेकर) प्रधानमंत्री अनवार उल-हक काकड़ अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण जबरदस्त विवादों में घिर गए हैं. काकड़ ने दावा किया कि पाकिस्तान की सभ्यता और संस्कृति की जड़ें 9,000 साल से भी अधिक पुरानी हैं और उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता, मेहरगढ़, हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो को पाकिस्तान की विरासत बताया. इस दावे के बाद इंटरनेट पर यूजर्स ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया.
पाकिस्तान के पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल-हक काकड़ ने मेहरगढ़ और सिंधु घाटी सभ्यता को 9,000 साल पुराना पाकिस्तानी इतिहास बताया. सोशल मीडिया यूजर्स ने इस दावे को हास्यास्पद करार देते हुए उन्हें याद दिलाया कि पाकिस्तान का वजूद 1947 में विभाजन के बाद शुरू हुआ था और ये सभी प्राचीन स्थल अखंड भारत की ऐतिहासिक विरासत हैं.
पूर्व केयरटेकर पीएम अनवार उल-हक काकड़ ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि पाकिस्तान की सांस्कृतिक जड़ें नौ हजार साल पुरानी हैं. उन्होंने मेहरगढ़ (7000–2500 ईसा पूर्व), रहमान ढेरी, हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो जैसी प्राचीन ऐतिहासिक खोजों का ब्योरा दिया. इसके साथ ही उन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान के प्राचीन शिलालेखों का हवाला देते हुए लिखा कि 14 अगस्त 1947 को इस प्राचीन राष्ट्र का राजनीतिक पुनर्जन्म हुआ था.
Pakistan is a civilizational state whose historical roots extend more than nine millennia.
Mehrgarh (c. 7000–2500 BCE), Rehman Dheri (c. 4000–3300 BCE), Harappa (from c. 3300 BCE), and Mohenjo-daro (c. 2500–1900 BCE). In…
— Anwaar ul Haq Kakar (@anwaar_kakar) September 30, 2026
काकड़ का यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आइना दिखाना शुरू कर दिया. यूजर्स ने याद दिलाया कि पाकिस्तान का जन्म 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद हुआ था, इसलिए प्राचीन भारतीय उपमहाद्वीप की सनातनी और सिंधु सभ्यता पर पाकिस्तान का दावा पूरी तरह हास्यास्पद है. कई यूजर्स ने लिखा कि पाकिस्तान का इतिहास सिर्फ 80 साल पुराना है और वह भारत के अतीत को हड़पने की नाकाम कोशिश कर रहा है.
ट्विटर पर लोगों ने कहा कि काकड़ जिन प्राचीन स्थलों की बात कर रहे हैं, वे ऐतिहासिक रूप से प्राचीन भारत और सनातन संस्कृति का हिस्सा हैं. यूजर्स ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि पाकिस्तान एक जोड़-तोड़ से बना देश है, जिसकी अपनी कोई ऐतिहासिक पहचान नहीं है. लोगों ने यह भी लिखा कि 1947 से पहले ‘पाकिस्तान’ नाम की कोई भौगोलिक या सांस्कृतिक इकाई अस्तित्व में ही नहीं थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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