पाकिस्तान इन दिनों दोहरे संकट का सामना कर रहा है. एक ओर उसकी सीमाओं पर तालिबान का हमला लगातार बढ़ रहा है, वहीं देश के भीतर पंजाब और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में डेंगू और अन्य जानलेवा संक्रमण की चपेट ने लोगों की जानें खतरे में डाल दी हैं. इस स्थिति ने वहां के नागरिकों और स्वास्थ्य तंत्र दोनों के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है. सीमाई हमले और स्वास्थ्य संकट के बीच पाकिस्तान की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की परीक्षा कठिन मोड़ पर पहुंच गई है.
पाकिस्तान का पंजगुर जिला इन दिनों डेंगू की चपेट में है. इसने क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी है. स्थानीय मीडिया ने रविवार को बताया कि कई पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के इस वायरस से संक्रमित होने की खबर मिली है. पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों और लोगों ने बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से किए जा रहे उपायों को नाकाफी बताया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कराची से आए कई लोगों में वायरस की पुष्टि हुई है.
वहीं ये जिले के विभिन्न इलाकों, खासकर खुदाबदान और चिटकन इलाकों में फैल रहा है. निवासियों ने कहा कि अधिकारियों द्वारा कीटनाशकों का छिड़काव करने में असमर्थता और एक समर्पित डेंगू नियंत्रण इकाई की कमी ने इस प्रकोप को और बढ़ा दिया है. एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया, “पंजगुर की आबादी लगभग दस लाख है, फिर भी डेंगू से निपटने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है.” सामाजिक कार्यकर्ता के अनुसार, वर्षों से मच्छर-रोधी स्प्रे अभियान प्रतीकात्मक ही रहे, ये वास्तविक कार्रवाई के बजाय केवल फोटो खिंचवाने तक सीमित रहे हैं.
नेशनल पार्टी के नेता और बलूचिस्तान विधानसभा में उप संसदीय नेता रहमत सालेह बलूच ने स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बलूचिस्तान सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (यूनिसेफ) से चिकित्सा दल भेजने और प्रकोप को रोकने के लिए आपातकालीन उपाय करने का अनुरोध किया. रहमत सालेह बलूच ने प्रांतीय स्वास्थ्य विभाग से पंजगुर को डेंगू प्रभावित जिला घोषित करने और आपातकालीन उपाय करने का आग्रह किया, जिसमें फ्यूमिगेशन (मच्छरों या कीटों को मारने के लिए एक बंद स्थान में जहरीली गैस (फ्यूमिगेंट) का उपयोग), जन जागरूकता अभियान और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार शामिल हैं.
स्थानीय लोगों और नागरिक समाज संगठनों ने प्रांतीय विधानसभा सदस्यों असदुल्लाह बलूच और रहमत सालेह बलूच से प्रांतीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने और पंजगुर अस्पताल में एक डेंगू उपचार इकाई की स्थापना सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. इस बीच, डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को पेशावर के सुफैद ढेरी इलाके को ‘चिकनगुनिया प्रकोप क्षेत्र’ घोषित कर दिया. यहां मच्छरों के काटने से होने वाले वायरल बुखार के 16 मामले सामने आए थे.
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, चिकनगुनिया के मामले उन इलाकों में सामने आए हैं जहां डेंगू का प्रकोप अधिक है. इसमें कहा गया है कि प्रकोप को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं.
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– भारत एक्सप्रेस
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