पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दिए जाने के 45 साल बाद अचानक फिर से यह मामला देश दुनिया की सुर्खियां बन चुका है. इतने अर्से बाद जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दिए जाने के पर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तब कोर्ट द्वारा जुल्फिकार अलीभुट्टो को निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को कहा कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को 1979 में सैन्य शासन द्वारा फांसी दी गई थी, लेकिन उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली.
आसिफ अली जरदारी ने की थी फांसी की सजा पर विचार की मांग
मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा ने पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के संस्थापक को दी गई मौत की सजा से संबंधित राष्ट्रपति के संदर्भ की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत की नौ सदस्यीय बड़ी पीठ की सर्वसम्मत राय की घोषणा की. यह 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा अपने ससुर जुल्फिकार अली भुट्टो को हत्या के मामले में उकसाने के लिए दोषी ठहराए जाने और 1979 में उनकी फांसी की सजा पर फिर से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में भेजे गए एक विशेष मामले पर आधारित है.
न्यायधीश ने कही यह बात
सर्वसम्मत राय की घोषणा करते हुए, न्यायधीश ईसा ने कहा, “लाहौर उच्च न्यायालय द्वारा मुकदमे की कार्यवाही और पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपील अनुच्छेद 4 और 9 में निहित निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया के मौलिक अधिकार की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है.” संविधान का और बाद में संविधान के अनुच्छेद 10 ए के तहत एक अलग और मौलिक अधिकार के रूप में गारंटी दी गई. शीर्ष अदालत ने अपनी राय व्यक्त की लेकिन यह भी फैसला सुनाया कि भुट्टो की मौत की सजा के फैसले को बदला नहीं जा सकता क्योंकि संविधान और कानून इसकी अनुमति नहीं देते हैं और इसे फैसले के रूप में बरकरार रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट बाद में विस्तृत राय जारी करेगा.
इसे भी पढ़ें: अमेरिका में राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनाव का ‘सुपर ट्यूजडे’, 15 राज्यों में चुनाव, 12 में ट्रंप ने दर्ज की रिकाॅर्ड तोड़ जीत
सेना और कोर्ट की मिलीभगत से दी गई फांसी
51 वर्षीय भुट्टो को सात सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद फांसी दी गई थी, कई लोगों का मानना है कि यह तत्कालीन सैन्य तानाशाह जनरल जियाउल हक के दबाव में किया गया था, जिन्होंने 1977 में भुट्टो की सरकार को गिरा दिया था. भुट्टो के समर्थकों, जिन्होंने बाद में उनकी फांसी को “न्यायिक हत्या” करार दिया और सैन्य शासक और शीर्ष अदालत पर एक निर्वाचित प्रधान मंत्री को मनगढ़ंत आरोपों पर फांसी देने के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया. उन्होंने शीर्ष अदालत से भुट्टो के साथ हुए अन्यायपूर्ण व्यवहार को वापस लेने की मांग की.
Aaj Ka Panchang 6 November 2026: 6 नवंबर को धनतेरस के साथ शुक्र प्रदोष व्रत…
Aaj Ka Rashifal 6 November 2026: 6 नवंबर को चंद्रमा और शुक्र कन्या राशि में…
Dhanteras 2026: धन का धर्म और मर्म. धनतेरस पर भगवान धन्वन्तरि, श्री लक्ष्मी-विष्णु और कुबेर…
Dhanteras Yamraj deepdan south direction diya vidhi: धनतेरस पर यमराज के लिए दीपदान से अकाल…
Dhanteras kab hai: धनतेरस न केवल भौतिक वस्तुओं की खरीदारी का, बल्कि आरोग्य और सुरक्षा…
गृह मंत्री अमित शाह 9 नवंबर को गांधीनगर में ₹1,024 करोड़ के 30 प्रोजेक्ट्स का…