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अमेरिका से टूटा यूरोप का मोह! ग्रीनलैंड विवाद ने घोला रिश्तों में जहर; सिर्फ 25% लोग मानते हैं ‘दोस्त’

US Europe Relations Crisis: ग्रीनलैंड विवाद ने यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में जो कड़वाहट पैदा की, वो अभी तक दूर नहीं हुई. इसका उदाहरण अमेरिका और इरान के बीच चल रहे युद्ध में भी देखने को मिल रहा है. अब एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि सिर्फ 25 फीसदी यूरोपीय लोग अमेरिका को मित्र देश के रूप में देखते हैं.

एल एस्पानोल वेबसाइट पर हाल ही में एक रिपोर्ट जारी कर कहा गया कि कई यूरोपीय लोग अमेरिका को मित्र देश नहीं मानते हैं.

सिर्फ एक चौथाई यूरोपीय लोगों का समर्थन

इस रिपोर्ट का शीर्षक है कि ट्रंप अटलांटिक महासागर के जुड़ाव को बर्बाद करता हैः सिर्फ एक चौथाई यूरोपीय लोग अमेरिका को मित्र देश के रूप में देखते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि यह निष्कर्ष इस फरवरी के मध्य में जारी हुए दो पड़ताल से निकाला गया है. एक है कि थिंक-टैंक विदेशी संबंधों पर यूरोपीय परिषद द्वारा लिखी गयी एक रिपोर्ट और दूसरा है कि ब्रिटिश लोकमत सर्वे कंपनी प्बलिक फर्स्ट और अमेरिकी अख़बार पोलिटिको द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया एक जनमत सर्वेक्षण है.

स्पेन में आंकड़ा सिर्फ 10 प्रतिशत

विदेशी संबंध पर यूरोपीय परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, डेनमार्क, ब्रिटेन और पोलैंड में अलग-अलग तौर पर 58 प्रतिशत, 53 प्रतिशत और 47 प्रतिशत लोग अमेरिका को विश्वसनीय मित्र देश के दर्जे से घटाकर जरूरी साझेदार देखते हैं और उस पर अधिक उम्मीद नहीं बांधते. स्पेन में सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका यूरोपीय संघ का मित्र देश है.

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पोलिटिको अखबार के पड़ताल के परिणामों के अनुसार, अब अमेरिका को यूरोप की सुरक्षा की गारंटी के रूप में नहीं देखा गया है. इस अखबार के विश्लेषक एरिन दोहर्टी और यूरोप स्थित चीफ संवाददाता निकोलस विनोकुर ने कहा कि अमेरिका की प्रतिष्ठा के बिगड़ने से विश्व मंच पर अमेरिका की शक्ति को लेकर नयी शंका पैदा हो गयी है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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