American military loss Iran war: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव (US Iran conflict) को 60 दिन से ज्यादा हो चुके हैं. इस संघर्ष में अमेरिका को अब तक बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है. अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, ईरान के मिसाइल हमलों, ड्रोन और एक गलती से हुए ‘फ्रेंडली फायर’ की वजह से अमेरिका के सैन्य उपकरणों को लगभग 2.3 से 2.8 अरब डॉलर (करीब 19,400 से 23,700 करोड़ रुपये) का भारी नुकसान हुआ है. यह आंकड़ा मुख्य रूप से हवाई सैन्य उपकरणों पर आधारित है. इसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों या नौसेना के जहाजों को हुए नुकसान को शामिल नहीं किया गया है.
अमेरिका-ईरान का संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था. इस दौरान ईरान ने अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैनिकों वाले बेस को भी निशाना बनाया. साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने से तेल की आवाजाही पर असर पड़ा.
CSIS के सीनियर एडवाइजर मार्क कैनशियन के अनुसार इस संघर्ष में नुकसान का बड़ा हिस्सा अलग-अलग घटनाओं से जुड़ा है. उनकी रिपोर्ट बताती है कि THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम के एक या दो मजबूत रडार नष्ट हुए, जिनकी कीमत लगभग 4,100 करोड़ से 8,200 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है. इसके अलावा ईरान के हमलों और एक फ्रेंडली फायर घटना की वजह से कुल मिलाकर 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ. इसी घटना में कुवैत में मौजूद तीन F-15 फाइटर जेट भी नष्ट हो गए.
26 मार्च को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कैबिनेट बैठक में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने इतिहास में अब तक सबसे तेज और प्रभावी तरीके से किसी भी दुश्मन को कमजोर किया है. लेकिन इसके अगले ही दिन, 27 मार्च को ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी एयरबेस ‘प्रिंस सुल्तान’ पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया.
इस हमले में अमेरिका का एक बेहद कीमती E-3 AWACS निगरानी विमान नष्ट हो गया, जिसकी कीमत करीब 5,920 करोड़ रुपये बताई जाती है. यह विमान हवा में उड़ते हुए एक कमांड सेंटर की तरह काम करता है और दूर-दराज में मौजूद दुश्मन के विमानों और मिसाइलों की पहचान करने में सक्षम होता है.
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अमेरिका इस जंग को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन राजनीतिक कारणों से नुकसान के पूरे आंकड़े सामने नहीं ला रहा है. हालांकि अमेरिका ने कुछ सैन्य सफलताएं जरूर हासिल की हैं, लेकिन उसके बड़े रणनीतिक लक्ष्य अभी पूरे नहीं हुए हैं. स्थिति कुछ वैसी ही मानी जा रही है जैसी 2003 के इराक युद्ध और अफगानिस्तान में हुई थी, जहां शुरुआती जीत बाद में लंबी और जटिल चुनौतियों में बदल गई.
फिलहाल अमेरिका ने इस क्षेत्र में उतनी बड़ी सैन्य तैनाती नहीं की है जितनी इराक युद्ध के समय थी. दूसरी ओर, ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता ने अमेरिकी हवाई उपकरणों को काफी नुकसान पहुंचाया है. CSIS की रिपोर्ट को अब तक का सबसे विस्तृत आकलन माना जा रहा है, लेकिन इसमें सैन्य ठिकानों की इमारतों या कुछ अन्य उपकरणों का नुकसान शामिल नहीं है, इसलिए वास्तविक नुकसान और ज्यादा हो सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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