US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पिछले कई दशकों से जारी है. अब हालात एक फिर बेहद गंभीर होते दिख रहे हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei), जिनके बारे में कभी रूस में शरण लेने की अटकलें थीं, अब देश में रहकर अमेरिका को करारा जवाब देने की रणनीति बना चुके हैं.
हाल ही में अली खामेनेई ने अमेरिका में ट्रंप सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का दखल रेड लाइन माना जाएगा और ऐसा होने पर अमेरिका को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान हस्तक्षेप करने की बात कही थी. अब ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका को सबक सिखाने के लिए तैयार है.
खामेनेई ने अमेरिका और ट्रंप को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि दुश्मन जानते हैं कि ईरान को युद्ध से घुटने टेकने पर मजबूर नहीं किया जा सकता, इसलिए अब वे आंतरिक फूट डालकर लक्ष्य हासिल करने की कोशिश में हैं. उन्होंने ईरान के लोगों से कहा कि आप सभी को देश की सेवा करने वालों का, खासकर मेहनती राष्ट्रपति का सपोर्ट करना चाहिए. ईरान अमेरिका की अपमानजनक मांग के खिलाफ मजबूती से खड़ा है.
खामेनेई ने आगे कहा कि जो लोग पूछते हैं कि हम अमेरिका से सीधे बातचीत क्यों नहीं करते तो ऐसे लोग दूरदर्शी नहीं हैं अमेरिका चाहता है कि ईरान उसके अधीन रहे. ईरानी राष्ट्र इस बड़े अपमान से बहुत आहत है और इस झूठी उम्मीद को पालने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अपनी पूरी ताकत से खड़ा रहेगा.
ईरान के सुप्रीम लीडर ने खामेनेई कहा कि ईरान पर हमला शुरू होने के एक दिन बाद अमेरिकी एजेंटों का एक समूह इस्लामी गणराज्य पर मंथन करने के लिए एक यूरोपीय राजधानी में इकट्ठा हुआ. उन्होंने एक राजा भी नियुक्त किया. मूर्खों की इस भीड़ में एक ईरानी व्यक्ति भी शामिल था. उस ईरानी पर धिक्कार है. खामेनेई ने कहा कि अमेरिका में वर्तमान पद पर आसीन व्यक्ति ने इस मामले का पर्दाफाश किया और असली मकसद स्पष्ट किया.
अली खामेनेई ने आगे कहा कि ईरान के साथ उनका टकराव इसलिए है ताकि ईरान अमेरिका का आज्ञाकारी बने. ईरान ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी कि देश के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का दखल रेड लाइन माना जाएगा और ऐसा होने पर अमेरिका को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
सैन्य कार्रवाई की धमकी- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और दूसरे वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने अमेरिका को सख्त जवाब देने का खुला ऐलान किया है, जिसमें अमेरिकी ठिकानों पर हमले की संभावना भी शामिल है. मिसाइल रेंज-एक ईरानी सांसद ने ये भी दावा किया है कि ईरान की मिसाइलें यूरोप तक मार कर सकती हैं और भविष्य में वाशिंगटन डीसी को भी निशाना बना सकती हैं.
अमेरिका का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. ईरान हमेशा जोर देता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन उसने यूरेनियम को लेकर जिस तरह से मजबूती पाई है. उससे अमेरिका ही नहीं पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ गई है.
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अमेरिका, ईरान पर मध्य पूर्व में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाता है. ईरान अपने कुद्स फोर्स (Quds Force) के जरिए हमास (Hamas), हिज्बुल्लाह (Hezbollah) और हौथी (Houthi) जैसे प्रॉक्सी समूहों को सैन्य सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिसे अमेरिका आतंकवाद का प्रमुख प्रायोजक मानता है.
कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि ईरान का वास्तविक खतरा उसकी एक स्वतंत्र विदेश नीति है जो अमेरिकी प्रभाव और नियंत्रण से बाहर है, और वो मध्य पूर्व में अमेरिकी और इजराइली आधिपत्य को चुनौती देता है.
अमेरिका ने ईरान पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिन्हें अधिकतम दबाव रणनीति का हिस्सा बताया गया है, ताकि उसे अपनी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूर किया जा सके.
अमेरिकी सरकार ईरान पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाती है, और हालिया सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कार्रवाई को लेकर चेतावनी भी जारी की है.
इन सभी मुद्दों ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास और तनाव को जन्म दिया है, जिससे सैन्य संघर्ष का जोखिम बना रहता है. ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को हिंसा से कुचलता है, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. ईरान ने इसे नकारते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनकी सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय अराजकता फैल सकती है.
सैन्य शक्ति के मामले में अमेरिका, ईरान के मुकाबले कहीं ज्यादा ताकतवर है. ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स 2025 की मुाताबिक अमेरिका सैन्य शक्ति के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि ईरान 16वें स्थान पर है.
साल 2025 के आंकड़ों की मुताबिक सैन्य क्षमताओं की तुलना करें तो दोनों देशों के बीच जमीन आसामान का फर्क है. ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान की धमकी को अमेरिकी कितनी गंभीरता से लेता है.
-भारत एक्सप्रेस
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