दुनिया

अमेरिका ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज की, 22 हवाई हमलों से गूंज उठी युद्ध की आवाज

अमेरिका ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को तेज कर दिया है. इस अभियान के तहत मंगलवार की सुबह उत्तरी यमन में 22 हवाई हमले किए गए, जिनमें राजधानी सना, लाल सागर में कमरान द्वीप और तेल से भरपूर मरिब प्रांत को निशाना बनाया गया.

हूती-नियंत्रित अल-मसीराह टीवी और स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन हमलों का लक्ष्य राजधानी सना के पूर्व और दक्षिणी क्षेत्रों के साथ-साथ मरिब प्रांत था. गवाहों ने इन बमबारी को “बहुत शक्तिशाली और हिंसात्मक” बताया, हालांकि इस ऑपरेशन में किसी हताहत की तत्काल रिपोर्ट नहीं मिली है.

यह कार्रवाई रविवार रात के हवाई हमलों के बाद आई है, जिसमें बताया गया था कि सना में चार बच्चों की मौत हो गई और 25 लोग घायल हो गए थे. अमेरिका की यह सैन्य अभियान 15 मार्च से शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य लाल सागर में अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग पर हूती के हमलों को रोकना है.

हूती के खिलाफ अमेरिकी अभियान की प्रभावशीलता

यमनी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी हवाई हमले हूती के खिलाफ प्रभावी नहीं साबित हुए हैं. हूती अब भी अमेरिकी और इजरायली हितों को लक्षित कर रहे हैं. झिंहुआ न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, अक्टूबर 2023 से लेकर अप्रैल 2025 के बीच यमन में 17 अमेरिकी निर्मित MQ-9 रीपर ड्रोन को गिराया गया है.

सोमवार को हूती समूह ने तेल अवीव, इजरायल में एक सैन्य लक्ष्य पर ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली और लाल सागर में दो अमेरिकी युद्धपोतों पर क्रूज मिसाइल और ड्रोन से हमला किया.

अमेरिका के लिए चुनौतियां और रणनीतिक प्रभाव

अल अदीन के सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी अली बिन हादी ने कहा, “अमेरिका का हूती के खिलाफ अभियान अब तक अपने निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने में असफल रहा है.” उन्होंने कहा कि हूती समूह अब भी अंतर्राष्ट्रीय नौवहन को खतरा पहुंचाने में सक्षम है और अमेरिका को भारी लागत उठानी पड़ रही है बिना किसी महत्वपूर्ण प्रगति के.

वहीं, राजनीतिक विश्लेषक मुकबिल नाजी ने सुझाव दिया कि ये हवाई हमले “स्थल पर अभियानों की पूर्वसूचना” हो सकते हैं, जिसमें अमेरिका की सीधी सैन्य भागीदारी या यमन सरकार के समर्थन में बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

यमन सरकार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष राशाद अल-अलीमी ने सोमवार को हूती बलों के खिलाफ “एकजुट पंक्तियों और सक्रिय समर्थन” की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि “निर्णायक घड़ी निकट आ रही है” ताकि हूती मिलिशिया द्वारा उत्पन्न पीड़ा का अंत किया जा सके.

अलीमी ने सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया कि वह “हड़पी गई राज्य संस्थाओं को बहाल” करने के लिए प्रतिबद्ध है.

हूती के उद्देश्य और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

हूती समूह, जो उत्तरी यमन और राजधानी सना के अधिकांश हिस्सों को नियंत्रित करता है, 2014 से अंतर्राष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के खिलाफ लड़ाई में संलग्न है. हूती का कहना है कि लाल सागर में उनके समुद्री हमले इजरायली हमलों को रोकने और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवीय सहायता की वापसी को आसान बनाने के लिए हैं.

विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और हूती के बीच चल रहे संघर्ष से लाल सागर क्षेत्र में एक नए दीर्घकालिक मोर्चे के खुलने का खतरा है, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर जटिल प्रभाव पड़ सकते हैं.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: कलान मस्जिद में निर्माण पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

-भारत एक्सप्रेस

Aarika Singh

Recent Posts

उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा: पार्थिव शिवलिंग पूजन के बाद दिग्विजय सिंह का ‘धर्म की सियासत’ पर करारा हमला

MP Politics: महाकाल की नगरी उज्जैन से अयोध्या तक दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान…

2 minutes ago

शीतला माता मंदिर हादसे में बढ़ा मौतों का आंकड़ा, एक और घायल ने तोड़ा दम, 16 हुई मृतकों की संख्या

Sheetla Mata Temple Accident: ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण ट्रक हादसे…

2 minutes ago

दिल्ली हाई कोर्ट: पीएम की विदेश यात्राओं के उड़ान रिकॉर्ड आरटीआई में देने का CIC आदेश रद्द

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की वायुसेना विमान यात्राओं के…

21 minutes ago

दिल्ली में दशानन को झटका! रावण से नहीं हुआ एक दिन इंतजार, खुद हुआ भस्म; देखें VIDEO

Ravan Dahan Viral Video Delhi: दिल्ली के पटेल नगर में दशहरे से एक दिन पहले…

29 minutes ago