अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ प्लान को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया और वे ऐसे व्यापक टैरिफ नहीं लगा सकते. इससे पहले लगाए गए टैरिफ अब गैरकानूनी हो गए हैं.
हालांकि, कोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने फिर से 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया. अब सवाल उठ रहा है कि अमेरिका से व्यापार करने वाले देशों को उनके पुराने टैरिफ के पैसे वापस मिलेंगे या नहीं. ट्रंप के आदेश और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भारत, ब्राजील जैसे देशों के लिए क्या मतलब है, आइए यहां समझने की कोशिश करेंगे-
ट्रंप ने पिछले साल आपातकालीन शक्तियों के नाम पर दुनिया भर पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगा दिए थे. भारत पर 18%, EU और जापान-दक्षिण कोरिया पर 15%, वियतनाम पर 20% तक टैरिफ थे. कुछ देशों पर 50% तक भी पहुंच गए थे. अमेरिका को इससे 2025 में करीब 200 अरब डॉलर का रेवेन्यू मिला. लेकिन कई कंपनियों और राज्यों ने कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि IEEPA से राष्ट्रपति टैरिफ नहीं लगा सकता.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने फैसला में कहा कि आपातकाल में भी ऐसे बड़े टैरिफ लगाना कानून के खिलाफ है. इससे ट्रंप को बड़ा झटका लगा. उन्होंने गुस्से में कहा कि कोर्ट के फैसले से उनका गणित बिगड़ गया. ट्रंप ने तुरंत धारा 122 के तहत दुनियावालों पर फिर से 10% ग्लोबल टैरिफ लगा दिया. व्हाइट हाउस ने कहा कि भारत अब 18% की जगह 10% टैरिफ देगा. EU, जापान, दक्षिण कोरिया भी 15% से 10% पर आ गए. वियतनाम 20% से 10% पर. यह टैरिफ फिलहाल लागू है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड पर कुछ नहीं कहा. लेकिन अब पुराने IEEPA टैरिफ गैरकानूनी हैं तो रिफंड की राह खुल गई है. अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स का कहना है कि 200,000 से ज्यादा छोटे-मध्यम बिजनेस को राहत मिलेगी. रिफंड सिर्फ उन अमेरिकी इंपोर्टर्स को मिलेगा जिन्होंने सीधे टैरिफ पेमेंट किया या माल का मालिकाना हक लिया. जो कंपनियां टैरिफ नहीं चुकाईं, वे पात्र नहीं. कुल 130 से 175 अरब डॉलर तक के रिफंड की बात हो रही है. प्रक्रिया जटिल होगी और कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में केस चलेगा. इसमें 12-18 महीने लग सकते हैं. उपभोक्ताओं को सीधे फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि कंपनियां लागत बढ़ा चुकी हैं.
भारत समेत ब्राजील, कनाडा, चीन, मैक्सिको जैसे देशों को राहत मिली है. टैरिफ कम होने से भारतीय निर्यात सस्ता हो सकता है. लेकिन रिफंड अमेरिकी इंपोर्टर्स को मिलेगा, भारतीय निर्यातकों को सीधे नहीं. भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है. व्यापार विशेषज्ञ कहते हैं कि नया 10% टैरिफ भी चुनौती है लेकिन पुराने से बेहतर है. ट्रेड डील की बातें फिर शुरू हो सकती हैं.
ट्रंप सरकार कोर्ट में टैरिफ के रिफंड के खिलाफ लड़ सकती है. कई कंपनियां पहले से क्लेम कर रही हैं. यह वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता ला सकता है. लेकिन छोटे बिजनेस को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. भारत के लिए टैरिफ 10% पर टिके रहना अच्छा संकेत है.
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-भारत एक्सप्रेस
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