America Immmigrants Legal Status: अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने शुक्रवार (21 मार्च) को कहा कि वह क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के लाखों लोगों के लिए कानूनी सुरक्षा (Legal Status) को रद्द कर देगा, जिससे उन्हें आने वाले लगभग एक महीने में संभावित निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है. यह आदेश इन चार देशों के लगभग 5,32,000 लोगों पर असर डालेगा, जो अक्टूबर 2022 से अमेरिका आए हैं.
ऐसे प्रवासी फाइनेंसियल स्पॉन्सर के साथ आए थे और उन्हें अमेरिका में रहने और काम करने के लिए दो साल का परमिट दिया गया था. होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा कि वे 24 अप्रैल को या संघीय रजिस्टर में नोटिस के प्रकाशन के 30 दिन बाद अपनी यह कानूनी स्थिति गवां देंगे. नई नीति उन लोगों को प्रभावित करती है जो पहले से ही अमेरिका में हैं और जो मानवीय पैरोल कार्यक्रम के तहत आए हैं.
मानवीय पैरोल सिस्टम लंबे समय से चला आ रहा एक लीगल सिस्टम है, जिसका उपयोग राष्ट्रपतियों ने उन देशों के लोगों को अनुमति देने के लिए किया है जहां युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता है. ऐसे में ये लोग अमेरिका में प्रवेश कर सकते हैं और अस्थायी रूप से रह सकते हैं. ट्रंप प्रशासन ने इस सिस्टम में व्यापक दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है.
ट्रंप प्रशासन द्वारा पांच लाख प्रवासियों का लीगल स्टेटस रद्द करने के निर्णय से कई लोगों को निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पैरोल प्रोग्राम के तहत अमेरिका में प्रवेश करने वाले कितने लोगों ने तब से सुरक्षा या लीगल स्टेटस के ऑप्शन हासिल किए हैं.
अपने चुनावी अभियान के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लाखों लोगों को निर्वासित करने का वादा किया था और राष्ट्रपति के रूप में वे अप्रवासियों के अमेरिका आने और रहने के कानूनी रास्ते भी समाप्त कर रहे हैं.
डीएचएस ने कहा कि अमेरिका में रहने के लिए वैध आधार के बिना पैरोल पर रिहा हुए लोगों को अपनी पैरोल खत्म होने वाली तारीख से पहले जाना होगा. डीएचएस ने कहा कि पैरोल स्वाभाविक रूप से अस्थायी है और अकेले पैरोल इमिग्रेशन पाने के लिए कोई आधार नहीं है.
प्रशासन के इस निर्णय को पहले ही अमेरिका के संघीय अदालतों में चुनौती दी जा चुकी है. अमेरिकी नागरिकों और अप्रवासियों के एक समूह ने मानवीय पैरोल को समाप्त करने के लिए ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा दायर किया और चार देशों के लिए वापस से परमिट योजना को बहाल करने की मांग कर रहे हैं. कई वकीलों और कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस निर्णय की निंदा की है.
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-भारत एक्सप्रेस
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