अजब-गजब

बादलों से गुजरती चिट्ठियां: बर्फीली वादियों के बीच रिश्तों की डोर थामे बैठा दुनिया का अनोखा पोस्ट ऑफिस

आज के समय में जब हम पलक झपकते ही व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में संदेश भेज देते हैं, तब शायद कागज की उस चिट्ठी की अहमियत कम लगने लगी हो. लेकिन हमारे देश में एक ऐसी जगह भी है, जहां आज भी डाकिया ही रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी है? बात हो रही हैं हिमाचल प्रदेश की बर्फीली पहाड़ियों में बसे ‘हिक्किम (Hikkim)’ डाकघर की. समुद्र तल से करीब 14,567 फीट की ऊंचाई पर स्थित ये छोटा सा पोस्ट ऑफिस सिर्फ भारत का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का सबसे ऊंचा सक्रिय डाकघर है.

सांसें फूलती हैं, पर सेवा नहीं रुकती

हिमाचल के स्पीति क्षेत्र के हिक्किम गांव में स्थित इस डाकघर तक पहुंचना किसी रोमांचक फिल्म के सीन जैसा है. यहां ऑक्सीजन की कमी और हड्डियों को जमा देने वाली ठंड हर पल इंसान का इम्तिहान लेती है. लेकिन कमाल की बात ये है कि साल 1983 से ये डाकघर बिना थके अपनी सेवाएं दे रहा है. जब चारों तरफ नेटवर्क गायब हो जाता है और मोबाइल फोन महज एक डब्बा बनकर रह जाते हैं, तब हिक्किम का ये छोटा सा मिट्टी का घर पूरी दुनिया के लिए उम्मीद का केंद्र बन जाता है.

दुर्गम गांवों की इकलौती जीवनरेखा

हिक्किम का ये पोस्ट ऑफिस सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है. लांगचा-1, लांगचा-2 और कॉमिक जैसे दूर-दराज के गांव आज भी दुनिया से जुड़ने के लिए इसी डाकघर पर निर्भर हैं. स्पीति घाटी में मौसम का मिजाज इतना सख्त होता है कि साल के छह महीने तो ये इलाका पूरी तरह दुनिया से कटा रहता है.

जून से अक्टूबर के बीच जब रास्ते खुलते हैं, तब डाकिए दुर्गम पहाड़ियों और खतरनाक मोड़ों को पार कर चिट्ठियां पहुंचाते हैं. कई बार तो डाक कर्मचारियों को पीठ पर झोला लादे कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है, क्योंकि वहां गाड़ियों का पहुंचना नामुमकिन होता है.

पर्यटकों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं

आजकल हिक्किम का ये डाकघर पर्यटकों के लिए एक ‘बकेट लिस्ट’ डेस्टिनेशन बन चुका है. जो भी सैलानी स्पीति घूमने आता है, वह यहां से अपने घर या दोस्तों को एक पोस्टकार्ड जरूर भेजता है. जब उस पोस्टकार्ड पर दुनिया के सबसे ऊंचे डाकघर की विशेष मोहर लगती है, तो वह महज एक कागज नहीं बल्कि एक यादगार तोहफा बन जाता है. सर्दियों में जब बर्फ की मोटी चादर पूरे गांव को ढक लेती है, तो डाक सेवा अस्थायी रूप से रुक जाती है, लेकिन जैसे ही बसंत की पहली किरण बर्फ को पिघलाती है, ये सेवा फिर से मुस्कुरा उठती है.

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-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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