मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप यही कहेंगे कि ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय, और जो बोए कांटा सो कांटा ही पाए’. आमतौर पर शादी के दिन दूल्हा अपनी बारात और दुल्हन के स्वागत की तैयारियों में व्यस्त रहता है, लेकिन इंदौर के अम्बामोलिया गांव का रहने वाला उमेश गंगोलिया कुछ अलग ही इरादे से घर से निकला. उमेश हल्दी की रस्मों के बीच गले में वरमाला लटकाए सीधे कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंच गया. उसे लगा था कि दूल्हे के लिबास में उसे सहानुभूति मिलेगी, लेकिन पासा ऐसा उल्टा पड़ा कि लेने के देने पड़ गए.
साहब, दुल्हन कैसे लाऊं?
कलेक्टर कार्यालय में जब ये ‘पीला’ दूल्हा अपनी फरियाद लेकर पहुंचा, तो वहां मौजूद अधिकारी भी एक पल के लिए ठिठक गए. उमेश ने कलेक्टर शिवम वर्मा के सामने बड़े ही मासूम अंदाज में अपना दुखड़ा सुनाया. उसने कहा कि साहब, घर में शादी है, दुल्हन आने वाली है लेकिन घर के सामने दबंगों ने नाले और आम रास्ते पर कब्जा कर रखा है. हर तरफ गंदगी है, ऐसे में मैं अपनी दुल्हन को घर कैसे लाऊंगा? दूल्हे की व्यथा और उसके हुलिए को देखकर कलेक्टर ने भी मानवीय आधार पर तुरंत संवेदनशीलता दिखाई. उन्होंने बिना वक्त गंवाए एसडीएम प्रियंका चौरसिया को निर्देश दिए कि टीम के साथ गांव जाएं और रास्ता साफ करवाएं ताकि दूल्हा अपनी दुल्हन को सम्मान के साथ घर ला सके.
बुलडोजर पहुंचा तो खुल गई पोल
प्रशासन की टीम जब लाव-लश्कर के साथ अम्बामोलिया गांव पहुंची, तो वहां की हकीकत दूल्हे की कहानी से बिल्कुल जुदा निकली. नाप-जोख शुरू हुई तो पता चला कि जिस नाले और रास्ते की उमेश शिकायत कर रहा था, उस पर सबसे बड़ा अवैध कब्जा किसी और का नहीं बल्कि खुद दूल्हे राजा का ही था.
उमेश ने नाले की जमीन पर करीब 30 फीट लंबा अतिक्रमण कर रखा था. दूल्हे ने सोचा था कि शादी का कार्ड दिखाकर और दूल्हा बनकर वह प्रशासन की आंखों में धूल झोंक देगा और अधिकारियों के डर से गांव के दूसरे लोग अपना कब्जा हटा लेंगे, जबकि उसका कब्जा सुरक्षित रहेगा. लेकिन प्रशासन ने ‘दूल्हे राजा’ की इस चालाकी को भांप लिया.
दूल्हे के साथ 12 अन्य लोगों के कब्जे भी साफ
प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सबसे पहले दूल्हे उमेश के ही अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलवा दिया. इसके बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ा और पूरी गली में पैमाइश की गई. इस दौरान गांव के 12 अन्य रसूखदारों के भी अवैध कब्जे सामने आए, जिन्होंने नाले के बहाव को रोक रखा था. देखते ही देखते प्रशासन ने सभी अतिक्रमण जमींदोज कर दिए और सालों से बंद पड़ा नाला फिर से खुल गया. अब गांव वाले प्रशासन की इस कार्रवाई से बेहद खुश हैं क्योंकि जल निकासी की बड़ी समस्या हल हो गई है. वहीं, अपनी ही चाल में फंसे दूल्हे को अब बिना अतिक्रमण वाले घर में दुल्हन का स्वागत करना पड़ेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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