Ajab Gajab News: जब हम बैंक का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में कैश, चेकबुक और भारी-भरकम कागजी कार्रवाई घूमने लगती है. लेकिन महाराष्ट्र के जलगांव जिले में एक ऐसा ‘बैंक’ चल रहा है, जिसने बैंकिंग की पूरी परिभाषा ही बदल दी है. यहां आपको नोटों की गड्डियां नहीं, बल्कि ‘बकरियां’ लोन में मिलती हैं.
सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन ‘गोट बैंक’ की यह पहल जमीन पर सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी बदल रही है. आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा मॉडल काम कैसे करता है और इसने जलगांव की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर कैसे बना दिया है.
जलगांव जिले की चालीसगांव तहसील में ‘सेवा सहयोग फाउंडेशन’ नाम की एक संस्था इस अनोखे बैंक को चला रही है. इस बैंक का मकसद मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि उन महिलाओं को सहारा देना है जो बेहद गरीब हैं, विधवा हैं या जिनके पास खेती के लिए अपनी जमीन नहीं है.
अक्सर गांवों में महिलाओं के पास हुनर तो होता है, लेकिन पूंजी की कमी के कारण वे कोई काम शुरू नहीं कर पातीं. इसी खाली जगह को भरने के लिए इस फाउंडेशन ने बकरी पालन को स्वरोजगार का जरिया बनाया. आज इस बैंक की मदद से 300 से ज्यादा महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं.
इस बैंक की सबसे खास बात इसकी रिकवरी प्रोसेस है. जब कोई महिला इस बैंक से जुड़ती है, तो उसे सबसे पहले बकरी पालन की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके बाद उसे एक तंदुरुस्त बकरी लोन के तौर पर दी जाती है.
अब आप सोच रहे होंगे कि लोन है तो इसकी किस्तें कैसे भरी जाती होंगी? यहीं पर इस बैंक का ‘सोशल मॉडल’ सामने आता है. महिला को नकद पैसे वापस नहीं करने होते.
40 महीने का एक एग्रीमेंट होता है. इस दौरान जब बकरी बच्चे देती है, तो महिला को कुल 4 स्वस्थ मेमने बैंक को वापस करने होते हैं. ये 4 मेमने ही इस ‘लोन’ की अदायगी और ब्याज हैं.
जैसे ही बैंक के पास ये नए मेमने आते हैं, उन्हें बड़ा करके किसी दूसरी जरूरतमंद महिला को लोन के तौर पर दे दिया जाता है. इस तरह यह चेन चलती रहती है.
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बकरी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें निवेश कम और फायदा ज्यादा है. एक बकरी से मिलने वाले दूध को बेचकर महिलाएं घर का खर्च चला रही हैं. इसके अलावा, जो मेमने वे अपने पास रखती हैं, उन्हें बाजार में बेचकर वे सालभर में 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई कर रही हैं.
ग्रामीण इलाकों में 30 हजार रुपये की यह एक्स्ट्रा इनकम बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घर की मरम्मत जैसे कामों में बड़ी मदद साबित हो रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि इन महिलाओं को अब साहूकारों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और न ही कर्ज के बोझ तले दबना पड़ता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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