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अडानी फाउंडेशन और अनुष्का फाउंडेशन मिलकर करेंगे क्लबफुट से पीड़ित बच्चों की मदद

Adani Foundation Clubfoot Initiative: अडानी फाउंडेशन और अनुष्का फाउंडेशन ने मिलकर देश में क्लबफुट (टेढ़े पैर) से पीड़ित बच्चों के इलाज और देखभाल के लिए एक नई पहल शुरू की है. इस योजना के तहत अगले तीन साल में 10,000 से ज्यादा बच्चों को फायदा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में चलाया जाएगा. इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक इलाज पहुंचाना, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना और बीमारी की समय पर पहचान सुनिश्चित करना है.

इस अभियान की शुरुआत कानपुर के मान्यवर कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रॉमा सेंटर से की गई. उत्तर प्रदेश में हर साल करीब 6,000 बच्चे क्लबफुट की समस्या के साथ जन्म लेते हैं, जो देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है.

जन्मजात बीमारी का होगा इलाज

क्लबफुट एक जन्मजात बीमारी है, जिसमें बच्चे का एक या दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं. समय पर इलाज मिलने पर इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. इसके लिए दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली पोनसेटी विधि काफी प्रभावी मानी जाती है.

61 जिलों के 67 क्लबफुट क्लीनिकों को समर्थन देगा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के सहयोग से यह कार्यक्रम 61 जिलों के 67 क्लबफुट क्लीनिकों को समर्थन देगा. साथ ही 51 स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और 30,000 से ज्यादा फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जागरूक किया जाएगा, ताकि बच्चों की जल्द पहचान कर उन्हें समय पर इलाज मिल सके.

अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी ने कहा कि फाउंडेशन का उद्देश्य ऐसे बच्चों को बेहतर जीवन देने में मदद करना है, जिनकी बीमारी का इलाज संभव है.

बच्चों तक सही समय पर पहुंचे सेवाएं

वहीं, अनुष्का फाउंडेशन के दीपक प्रेमनारायण ने कहा कि इस साझेदारी से ज्यादा बच्चों तक समय पर इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी.

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भारत में हर साल करीब 33,000 बच्चे क्लबफुट के साथ जन्म लेते हैं. इनमें से लगभग 12,000 बच्चे उन पांच राज्यों से होते हैं, जहां यह कार्यक्रम शुरू किया गया है. अनुष्का फाउंडेशन अब तक 13 राज्यों में 26,000 से ज्यादा बच्चों की मदद कर चुका है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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