आज का दिन गुजरात और देश की औद्योगिक यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है. वाइब्रेंट गुजरात के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में देश के कारोबारी समूह, अडानी ग्रुप ने एक ऐसा ऐलान किया है जिसने भविष्य के विकसित भारत की तस्वीर साफ कर दी है. अडानी ग्रुप आने वाले 5 सालों में अकेले कच्छ के इलाके में ₹1.5 लाख करोड़ का निवेश करने जा रहा है. यह घोषणा अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक करण अदानी ने राजकोट में आयोजित एक कार्यक्रम में की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे.
करण अदानी ने कहा कि गुजरात न केवल समूह के लिए एक निवेश गंतव्य है, बल्कि इसकी यात्रा की नींव भी है. उन्होंने कहा कि समूह का विकास दर्शन राष्ट्र के विकास के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है, जो आर्थिक विस्तार, जलवायु जिम्मेदारी और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन को दर्शाता है.
अडानी ग्रुप के लिए मुंद्रा सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उनकी ‘कर्मभूमि’ है. आज मुंद्रा भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट तो है ही, साथ ही यह एक ऐसा गेटवे बन चुका है जहां से देश का व्यापार दुनिया भर में फैलता है. अगले 10 सालों में इस पोर्ट की क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है.
इतना ही नहीं, मुंद्रा अब कॉपर स्मेल्टर प्लांट, कोल-टू-पीवीसी और सोलर मैन्युफैक्चरिंग जैसे बड़े उद्योगों का भी गढ़ बन चुका है. यानी आने वाले समय में मुंद्रा से न सिर्फ माल ढुलाई बढ़ेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
पर्यावरण और विकास को साथ लेकर चलने की मिसाल देते हुए अडानी ग्रुप खावड़ा में दुनिया का सबसे बड़ा ‘रिन्यूएबल एनर्जी पार्क’ विकसित कर रहा है. इसकी क्षमता 37 गीगावाट होगी. लक्ष्य यह है कि साल 2030 तक इस पूरे प्रोजेक्ट को चालू कर दिया जाए. यह प्रोजेक्ट दुनिया को भारत का वह चेहरा दिखाएगा जो आर्थिक तरक्की के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी भी बखूबी समझता है.
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए यह बात उभर कर आई कि कैसे पिछले कुछ सालों में भारत की सोच बदली है. अब हम सिर्फ छोटी-मोटी परियोजनाओं के बारे में नहीं सोचते, बल्कि एक ‘सिविलाइजेशनल मिशन’ (सभ्यतागत मिशन) के साथ आगे बढ़ रहे हैं.
आंकड़े खुद गवाही देते हैं कि गुजरात क्यों देश का इंजन है:
जब 1.5 लाख करोड़ जैसा बड़ा निवेश जमीन पर उतरता है, तो उसका असर सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहता. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और जीवन पर पड़ता है. अडानी ग्रुप का यह निवेश भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को मजबूती देगा. इससे न केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाएगा.
अडानी ग्रुप का मानना है कि उनकी प्रगति देश की प्रगति से अलग नहीं है. गुजरात से शुरू हुआ यह सफर अब पूरे भारत के लिए आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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