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GCC Growth In India: भारत में 1,700 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, टियर-2 और टियर-3 शहरों में लाखों लोगों को मिलीं नौकरियां

GCC Growth In India: भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की तेजी से बढ़ती मौजूदगी अब टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर रुख कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नई नीति, राज्यों द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन योजनाएं और मजबूत होते इकोसिस्टम से इन छोटे शहरों में GCCs का तेजी से विस्तार हो सकता है. इस बदलाव से बड़े शहरों पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सकता है. साथ ही, रोजगार के नए अवसर भी इन क्षेत्रों में पैदा होंगे.

भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं GCCs

फिलहाल देश में 1,700 से अधिक GCCs मौजूद हैं. हर हफ्ते औसतन दो नए केंद्र खुल रहे हैं. यह सेक्टर सालाना करीब 64.6 अरब डॉलर की कमाई कर रहा है और लगभग 19 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है. इनमें से 82,000 से ज्यादा नौकरियां टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं.

हालांकि बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे टियर-1 शहर अभी भी GCCs के मुख्य केंद्र बने हुए हैं, लेकिन छोटे शहरों में भी इनकी हिस्सेदारी बढ़ रही है—2019 में 5% से बढ़कर 2024 में 7% हो गई है.

सरकार का फोकस छोटे शहरों पर

फरवरी 2024 के बजट में केंद्र सरकार ने टियर-2 शहरों में GCCs को बढ़ावा देने के लिए एक फ्रेमवर्क की घोषणा की. इसमें टैलेंट डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और इंडस्ट्री के साथ सहयोग बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं. इसके अलावा कई मिड-साइज़ कंपनियां भी भारत में GCC खोलने को लेकर रुचि दिखा रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले एक साल में 120 से ज्यादा मिड-मार्केट कंपनियां भारत में अपने सेंटर्स शुरू कर सकती हैं.

Nasscom और Zinnov की रिपोर्ट के अनुसार, टियर-2 शहरों में डिजिटल स्किल्स वाले युवाओं की संख्या पिछले दो साल में 25% बढ़ी है. इन शहरों में कर्मचारी पलायन (Attrition) भी कम है—यहां यह 10–12% है, जबकि टियर-1 शहरों में यह 15.2% तक पहुंच जाता है.

इसके अलावा कंपनियों को 25% तक की लागत बचत होती है. कम रियल एस्टेट कीमतें, कम ओवरहेड खर्च और संतुलित वेतन अपेक्षाएं इसका मुख्य कारण हैं. Synopsys जैसी कंपनियों ने भुवनेश्वर में GCC खोलकर यह दिखा दिया है कि छोटे शहरों में भी विश्वस्तरीय टैलेंट मौजूद है. यहां के सेंटर ने स्थानीय IIT जैसे संस्थानों से जुड़कर एक मजबूत टेक्नोलॉजी नेटवर्क तैयार किया है.

टियर-2 शहर बन रहे हैं इनोवेशन हब

Mastercard ने वडोदरा में अपना टेक्नोलॉजी हब बनाया है, जहां 400 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं. कंपनी इसे महज एक ऑपरेशनल सेंटर नहीं, बल्कि एक इनोवेशन प्लेटफॉर्म मानती है. यहां से डिजिटल पेमेंट और कार्बन कैल्कुलेटर जैसे ग्लोबल सॉल्यूशन्स तैयार किए जा रहे हैं. आपको बता दें वडोदरा, नासिक, मैसूरु और कोयंबटूर जैसे शहर अब ऑटोमेशन, IoT और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन का नया चेहरा बन रहे हैं.

राज्य सरकारें भी GCCs को लुभाने में जुटी हैं. तमिलनाडु ने उच्च वेतन वाली नौकरियों पर सब्सिडी देने का एलान किया है. कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य भी GCC नीतियां बना रहे हैं, जिसमें फ्रेशर्स के लिए सब्सिडी, R&D प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल हैं.

मेट्रो शहरों का दबाव होगा कम

Sanofi GCC के प्रमुख मृणाल दुग्गल कहते हैं कि यह प्रतिस्पर्धी माहौल पूरे इकोसिस्टम के लिए लाभकारी है. इससे मेट्रो शहरों पर बोझ घटेगा और छोटे शहरों में इनोवेशन कल्चर पनपेगा. हालांकि, टियर-2 और 3 शहरों को पूरी तरह सक्षम बनाने में अभी कुछ बाधाएं हैं. हाई-स्पीड इंटरनेट, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर, और मजबूत स्टार्टअप नेटवर्क की कमी कई बार स्केलेबिलिटी को प्रभावित करती है.

उद्योग जगत यह भी मांग कर रहा है कि ट्रांसफर प्राइसिंग नीति को सरल बनाया जाए और “प्लग-एंड-प्ले” ढांचा तैयार किया जाए जिससे GCCs को जल्दी सेटअप करने में मदद मिले.

ये भी पढ़ें: तमिलनाडु में PM मोदी ने बताया– मॉडर्न होंगे 77 स्टेशन, अमृत भारत स्टेशन योजना से देशभर में आएगा बदलाव

-भारत एक्सप्रेस 

निहारिका गुप्ता

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