बेंगलुरु की टेक कंपनी Izmo की खास यूनिट Izmomicro ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने हाई-डेंसिटी सिलिकॉन फोटोनिक्स पैकेजिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया है जो भारत को अगली पीढ़ी की सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी की दौड़ में शामिल करता है. यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और 5G/6G टेलीकॉम नेटवर्क्स को नई ताकत देने वाली है.
इस प्लेटफॉर्म में 32-चैनल फाइबर इनपुट/आउटपुट की क्षमता है और इसका इनसर्शन लॉस 2 dB से भी कम है जो इंडस्ट्री में एक नया बेंचमार्क माना जा रहा है. इसे बनाना आसान नहीं था क्योंकि इसमें नैनोमीटर-लेवल ऑप्टिकल अलाइनमेंट, एडवांस असेंबली प्रोसेस और इलेक्ट्रॉनिक्स का सटीक इंटीग्रेशन शामिल है.
इसके अलावा, यह मॉड्यूल 32 DC इनपुट/आउटपुट और 4 RF इनपुट/आउटपुट को सपोर्ट करता है और 70 GHz तक की हाई-स्पीड RF परफॉर्मेंस देता है.
जैसे-जैसे पारंपरिक कॉपर इंटरकनेक्ट्स अपनी सीमा पर पहुंच रहे हैं सिलिकॉन फोटोनिक्स मल्टी-टेरेबिट डेटा ट्रांसमिशन के लिए नया विकल्प बन रहा है. यह तकनीक डेटा सेंटर्स, AI क्लस्टर्स और टेलीकॉम नेटवर्क्स को ज्यादा तेज और एनर्जी-एफिशिएंट बना रही है.
Izmomicro के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दिनानाथ सोनी ने कहा,
“दुनिया में कुछ ही कंपनियां इस तकनीक को हासिल कर पाई हैं और हम भारत में पहले हैं. यह हमारी सालों की R&D का नतीजा है और हमें ग्लोबल मार्केट में एक मजबूत पार्टनर बनाता है.”
2025 में ग्लोबल सिलिकॉन फोटोनिक्स मार्केट की वैल्यू $2.65 बिलियन है जो 2030 तक $9 बिलियन से ज्यादा पहुंचने की उम्मीद है. इस ग्रोथ में Izmomicro की नई तकनीक भारत को एक अहम खिलाड़ी बना सकती है.
Izmo के शेयरों ने इस खबर के बाद 20% का अपर सर्किट हिट किया और निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया.
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यह इनोवेशन सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं भारत की Make in India पहल को भी नई उड़ान दे रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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