दुनियाभर में चल रहे युद्ध, जियोपॉलिटिकल टेंशन और ऊर्जा संकट के बीच लंदन के मंच से भारत के लिए एक ऐसी ‘महा-क्रांतिकारी’ आवाज गूंजी है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. ‘लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक’ के दौरान आयोजित प्रतिष्ठित ‘अडानी ग्रीन एनर्जी डायलॉग’ में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी ने हुंकार भरते हुए भारत को ‘सुपरपावर’ बनाने का सबसे अचूक सीक्रेट खोल दिया है. उन्होंने दुनिया के नीति-निर्माताओं और निवेशकों को साफ कर दिया है कि भविष्य सिर्फ और सिर्फ ‘क्लीन एनर्जी’ और ‘महा-इलेक्ट्रिफिकेशन’ का है.
सागर अडानी ने अपने भाषण में एक ऐसा चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने बताया कि भारत अपनी 1.4 अरब की आबादी के साथ हर साल 10,000 टेरावाट-घंटे (TWh) ऊर्जा खर्च करता है, जबकि इतनी ही आबादी वाला चीन 32,810 टेरावाट-घंटे बिजली निगल जाता है. उन्होंने साफ कहा कि यही हमारी सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ा मौका है. अगले दो दशकों में भारत को 2,000 गीगावाट की नई कैपेसिटी जोड़नी है. हमें कोयले और पेट्रोल-डीजल की गुलामी छोड़कर देश की हर एक चीज को ‘इलेक्ट्रिफाई’ करना होगा.
अडानी ग्रुप हवा में बातें नहीं कर रहा है. इसी हफ्ते ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने यह ऐलान कर दिया है कि उनकी कंपनी इस ‘एनर्जी ट्रांजिशन’ में 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश करने जा रही है. यह दुनिया के प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा निवेश है. इसमें सिर्फ सोलर और विंड एनर्जी नहीं, बल्कि 10 GW की न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी विकसित करने का सबसे खूंखार प्लान भी शामिल है.
सागर अडानी ने बताया कि रिन्यूएबल एनर्जी का असली मजा तब है जब इसे बड़े बैटरी स्टोरेज और ‘पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स’ (PSPs) से जोड़ा जाए, ताकि 24 घंटे बिजली मिल सके. गुजरात के खावड़ा में अडानी 538 वर्ग किलोमीटर (पेरिस शहर से 5 गुना बड़ा) में दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट (30 GW) बना रहे हैं. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 50 GW का टारगेट अचीव करना है.
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लंदन साइंस म्यूजियम के इस हाई-प्रोफाइल इवेंट में लॉर्ड अडैर टर्नर और निगेल टॉपिंग जैसे दिग्गजों ने भी माना कि बिना इलेक्ट्रिफिकेशन के दुनिया नहीं बच सकती. सागर अडानी ने मोदी सरकार की भी जमकर तारीफ की और कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने रेड टेपिज्म को खत्म कर ऐसा माहौल बनाया है जहां बिजनेस और देश दोनों ‘रॉकेट’ की रफ्तार से उड़ सकते हैं. साफ है, अडानी ग्रुप का यह ‘मास्टरप्लान’ भारत की ऊर्जा निर्भरता की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है.
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