How to Get a Job in Google: आज के दौर में जब किसी युवा से उसके करियर और ‘ड्रीम जॉब’ के बारे में पूछा जाता है, तो जुबां पर सबसे पहला नाम ‘गूगल’ का ही आता है. आखिर आए भी क्यों न? आलीशान दफ्तर, फ्री खाना, जिम, गेमिंग ज़ोन और दुनिया की सबसे बेहतरीन सैलरी, यह सब किसी के लिए भी एक सपने जैसा होता है. लेकिन क्या गूगल में नौकरी पाना वाकई इतना आसान है?
आंकड़ों की मानें तो हर साल दुनिया भर से करीब 30 लाख लोग गूगल में अप्लाई करते हैं, जिनमें से सिलेक्शन सिर्फ 0.2% से 1% लोगों का ही हो पाता है. यानी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन पाने से भी ज्यादा मुश्किल है गूगल की दहलीज लांघना.
परेशान न हों, मुश्किल का मतलब ‘नामुमकिन’ नहीं होता. अगर आप भी गूगल का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं इसका पूरा प्रोसेस और कुछ ऐसी बातें जो आपको किसी किताब में नहीं मिलेंगी.
अक्सर लोगों को लगता है कि अगर आप IIT या NIT से नहीं हैं, तो गूगल के दरवाजे आपके लिए बंद हैं. यह एक बहुत बड़ा मिथक है. गूगल अब डिग्री से कहीं ज्यादा ‘स्किल्स’ और ‘प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी’ को अहमियत देता है.
हां, अगर आप टेक्निकल रोल (जैसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर) के लिए जा रहे हैं, तो B.Tech (CS/IT), MCA या डेटा साइंस जैसी डिग्री आपको एक अच्छी शुरुआत जरूर देती है. लेकिन गूगल ने खुद कई बार कहा है कि उनके पास ऐसे कई कर्मचारी हैं जिनके पास कोई कॉलेज डिग्री नहीं है, बस उनके पास कोडिंग और लॉजिक का जबरदस्त हुनर है.
1. प्रोफाइल और रेफरल का खेल सबसे पहले आपको ‘Google Careers’ पोर्टल पर अपनी पसंद की वैकेंसी ढूंढनी होगी. यहां आपका रिज्यूमे ही आपकी पहली पहचान है. इसे छोटा, साफ और प्रोजेक्ट-ओरिएंटेड रखें. एक प्रो-टिप ये है कि अगर आपकी जान-पहचान का कोई व्यक्ति पहले से गूगल में है, तो उससे ‘रेफरल’ मांगें. इससे आपके रिज्यूमे के शॉर्टलिस्ट होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
2. अगर आपका प्रोफाइल पसंद आता है, तो रिक्रूटर आपको फोन करेगा. यह कोई भारी-भरकम इंटरव्यू नहीं, बल्कि एक बेसिक बातचीत होती है ताकि समझा जा सके कि आप रोल के लिए कितने गंभीर हैं और आपकी कम्युनिकेशन कैसी है.
3. कोडिंग और प्रोजेक्ट्स की परीक्षा इसके बाद असली चुनौती शुरू होती है. आपको ऑनलाइन कोडिंग टेस्ट या घर से कोई प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए दिया जा सकता है. यहां आपकी स्पीड और एक्यूरेसी दोनों देखी जाती है.
4. इंटरव्यू के कड़े राउंड गूगल में आमतौर पर 3 से 5 टेक्निकल इंटरव्यू होते हैं. हर राउंड करीब 45 मिनट से एक घंटे का होता है. यहां आपसे डेटा स्ट्रक्चर, एल्गोरिदम और सिस्टम डिजाइन पर ऐसे सवाल पूछे जाएंगे जो आपका दिमाग घुमा सकते हैं.
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अब सवाल ये है कि आखिर ‘गूगलनेस’ क्या है? दरअसल, यह गूगल का सबसे अनोखा राउंड है. इसमें यह नहीं देखा जाता कि आप कितने होशियार हैं, बल्कि यह देखा जाता है कि आप एक इंसान के तौर पर कैसे हैं. क्या आप टीम में घुल-मिल सकते हैं? क्या आप दूसरों की मदद करते हैं? गूगल ऐसे लोगों को पसंद करता है जो ‘हंबल’ हों और नई चीजें सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें.
अब बात करते हैं उस चीज की जिसके लिए इतनी मेहनत की जाती है, सैलरी. गूगल अपने कर्मचारियों पर दिल खोलकर पैसा लुटाता है. भारत में अगर आप एक फ्रेशर के तौर पर ‘सॉफ्टवेयर इंजीनियर’ ज्वाइन करते हैं, तो आपका पैकेज 15 लाख से 40 लाख रुपये सालाना के बीच हो सकता है. इसमें स्टॉक्स और बोनस अलग से मिलते हैं. वहीं, इंटर्नशिप के दौरान भी छात्रों को 50 हजार से 1 लाख रुपये महीना तक स्टाइपेंड मिल जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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