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अब आम लोग भी बन सकेंगे एस्ट्रोनॉट, गगनयान के बाद खुलेगा अंतरिक्ष का रास्ता; जानें क्या है ISRO का बड़ा प्लान

Job in ISRO: अंतरिक्ष में जाने का सपना अब सिर्फ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहने वाला है. आने वाले समय में आम लोग भी अंतरिक्ष यात्रा कर सकते हैं, और इसके पीछे बड़ा प्लान बना रही है ISRO. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी की तैयारी है कि अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के शुरुआती चरण पूरे होने के बाद आम नागरिकों के लिए भी अंतरिक्ष के दरवाजे खोले जाएं.

आम लोग भी बनेंगे एस्ट्रोनॉट

अब तक भारत के पहले एस्ट्रोनॉट्स के तौर पर जिन लोगों को चुना गया है, वे सभी भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं. शुरुआती मिशनों में जोखिम ज्यादा होता है, इसलिए अनुभवी पायलटों को प्राथमिकता दी गई. लेकिन जैसे-जैसे तकनीक मजबूत होगी और मिशन सफल होते जाएंगे, वैसे-वैसे आम लोगों को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले बैच में बदलाव देखने को मिल सकता है. इसमें सिर्फ सैन्य पायलट ही नहीं, बल्कि साइंस और टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड वाले लोग भी शामिल किए जा सकते हैं. यानी STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) से जुड़े सिविलियन विशेषज्ञों को मौका मिलेगा. इसके साथ ही कुछ मिशन पायलट भी होंगे, ताकि तकनीकी समझ और उड़ान अनुभव दोनों का संतुलन बना रहे.

दुनिया के ट्रेंड पर चल रहा भारत

वैश्विक स्तर पर भी यही पैटर्न देखा गया है शुरुआत में अंतरिक्ष मिशन सैन्य पायलटों के भरोसे होते हैं, लेकिन बाद में नागरिकों को भी मौका दिया जाता है. भारत भी अब उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. अनुमान है कि भविष्य में हर साल दो मानव मिशन भेजे जा सकते हैं, जिससे ज्यादा एस्ट्रोनॉट्स की जरूरत पड़ेगी.

क्या होगी योग्यता?

अगर आप सोच रहे हैं कि अंतरिक्ष यात्री कैसे बनें, तो इसके लिए कड़ी तैयारी करनी होगी. मजबूत पढ़ाई, खासकर विज्ञान और तकनीक में पकड़, शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती बेहद जरूरी होगी. चयन प्रक्रिया आसान नहीं होती मेडिकल टेस्ट, ट्रेनिंग और कई तरह के सिमुलेशन से गुजरना पड़ता है. एक एस्ट्रोनॉट बनने में 4-5 साल तक का समय लग सकता है.

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आगे की बड़ी योजनाएं

भारत सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचने की ही नहीं, बल्कि वहां लंबे समय तक रहने की तैयारी भी कर रहा है. भविष्य में ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है, जहां रिसर्च और प्रयोग किए जाएंगे. ऐसे मिशनों में सिविलियन की भूमिका और भी अहम हो सकती है.

इसी बीच इसरो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है देश के हर गांव का सैटेलाइट मैप तैयार कर लिया गया है. इससे सरकारी योजनाओं को गांव स्तर पर बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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