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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से क्या बदलेगी भारतीयों की किस्मत? H-1B और ग्रीन कार्ड पर टकटकी

US Election Impact: अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनावों के परिणाम वहां रह रहे भारतीयों और खासकर वीजा पर नौकरी व पढ़ाई कर रहे लोगों के लिए बेहद अहम हैं. संसद (कांग्रेस) में सत्ता के समीकरण बदलने से इमिग्रेशन नीतियों पर सीधा असर पड़ता है. आइए जानते हैं कि इस चुनाव परिणाम का H-1B वीजा, ग्रीन कार्ड के बैकलॉग और स्टूडेंट वीजा के नियमों पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव परिणाम अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि H-1B वीजा कोटा, ग्रीन कार्ड का बैकलॉग और स्टूडेंट वीजा के नियमों में बदलाव की मांग लंबे समय से है, लेकिन इसके लिए विधायी सुधार और प्रशासनिक इच्छाशक्ति दोनों की जरूरत होती है. चुनाव नतीजों से भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं.

1. H-1B वीजा: क्या बदलेंगे नियम और कोटा?

आईटी सेक्टर के भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा सबसे बड़ा जरिया है. अमेरिकी संसद के पास इस वीजा प्रोग्राम के कानूनों, सालाना कोटे (मौजूदा समय में 65,000 रेगुलर और 20,000 एडवांस्ड डिग्री कोटा) और योग्यता के नियमों में बदलाव करने का अधिकार है. हालांकि, संसद में किसी भी दल का बहुमत हो, चुनाव नतीजों से H-1B के नियम रातों-रात नहीं बदल जाते, क्योंकि इसके क्रियान्वयन की कमान डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और USCIS के हाथ में होती है.

2. ग्रीन कार्ड: क्या भारतीयों का लंबा इंतजार होगा खत्म?

एंप्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड के लिए भारतीयों को सबसे लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिसका मुख्य कारण हर देश के लिए तय 7% की कैप है. अमेरिकी संसद चाहे तो इस सीमा को खत्म करने या बैकलॉग कम करने के लिए नया कानून ला सकती है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि नई संसद सुधारों का रास्ता तो खोल सकती है, लेकिन सिर्फ चुनाव जीतने से सालों पुराना बैकलॉग रातों-रात खत्म नहीं हो सकता.

3. स्टूडेंट वीजा और नए प्रशासनिक नियम

भारतीय छात्रों के लिए स्टूडेंट वीजा का ढांचा अमेरिकी कानूनों पर आधारित है, लेकिन इसके तहत मिलने वाली सुविधाओं और कार्य अवधि के नियम DHS तय करता है. प्रशासन के पास बिना नए संसद कानून के भी नियमों में फेरबदल करने की ताकत होती है, जैसा कि हाल ही में F-1 छात्रों से जुड़े नियमों में देखने को मिला है. यह साफ है कि कार्यपालिका और विधायिका दोनों मिलकर छात्रों के भविष्य को दिशा देते हैं.

यह भी पढ़ें-नीट-पीजी कट-ऑफ: सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट साझा करने का निर्देश दिया

-भारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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