मुंबई में आगामी बीएमसी चुनावों (15 जनवरी 2026) से पहले राजनीतिक माहौल गरम है. उद्धव बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के बीच गठबंधन बनने से मुस्लिम समुदाय में चिंता बढ़ गई है. मुंबई के प्रमुख इस्लामिक चेहरों में से एक मौलाना लुकमान नदवी ने इस गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मुसलमानों ने उद्धव ठाकरे को बार-बार समर्थन दिया, लेकिन अब क्या वे वादे निभाएंगे?
मौलाना लुकमान नदवी ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन बना. इसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना, एनसीपी और अन्य पार्टियां शामिल हुईं. मुसलमानों ने इस गठबंधन का खुलकर साथ दिया. उन्होंने अपनी जान-माल और तन-मन-धन की बाजी लगाई ताकि सांप्रदायिक ताकतें कमजोर हों. मुंबई में उद्धव ठाकरे की पार्टी के तीन सांसद जीते.
2024 नवंबर के विधानसभा चुनाव में भी उलेमा ने इंडिया गठबंधन को वोट देने का फैसला किया था. मौलाना ने बताया कि खुद उलेमा से बातचीत हुई और सबने मिलकर कम्युनल फोर्सेज को सत्ता से दूर रखने का संकल्प लिया. मुंबई में गठबंधन को अच्छी सीटें मिलीं. उद्धव ठाकरे की पार्टी को 10-12 सीटें मिलीं.
अब बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे से गठबंधन कर लिया है. मौलाना ने कहा कि राज ठाकरे हमेशा से कम्युनल रहे हैं. उन्होंने पहले मस्जिदों से मुसलमानों के खिलाफ जहर फैलाया. अब उनके साथ आने से मुसलमानों में डर है कि क्या उद्धव ठाकरे अब भी सेकुलर रहेंगे? क्या वे मुसलमानों के वोट लेकर दोस्ती का वादा निभाएंगे?
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मौलाना ने याद दिलाया कि मुसलमान लंबे समय से बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना को वोट देते आए हैं. इसी वजह से 30 साल तक मुंबई कार्पोरेशन में उनकी सरकार रही. अब सवाल है कि अगर गठबंधन की सरकार बनती है और मेयर उनका बनता है, तो क्या मुसलमान का नाम मेयर के लिए सुझाया जाएगा? क्या मुसलमान को मेयर या कम से कम उप-मेयर बनाया जाएगा?
मौलाना लुकमान नदवी ने साफ कहा कि मुसलमानों की मांग है कि मेयर का पद मुसलमान को दिया जाए. अगर उद्धव ठाकरे ऐसा करते हैं तो मुसलमान एहसान-शिनास रहेंगे. वे न तो नाशुक्रा होंगे और न ही एहसान फरामोश. लेकिन अगर वादे नहीं निभाए गए तो लोग एहसान फरामोशी की उम्मीद करेंगे.
यह बयान बीएमसी चुनावों के ठीक पहले आया है. मुंबई में 227 वार्डों में 15 जनवरी को वोटिंग होगी. उद्धव-राज गठबंधन माराठी अस्मिता और मुंबई की रक्षा का दावा कर रहा है, लेकिन मुस्लिम समुदाय राजनीतिक बदले की उम्मीद कर रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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