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Cannes 2025: इस एक्टर ने रचा इतिहास, Cannes फिल्म फेस्टिवल में डेब्यू करने वाले पहले IAS ऑफिसर बने

Cannes 2025: पूर्व IAS अधिकारी अभिषेक सिंह ने Cannes फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर चलकर इतिहास रच दिया है. वह इस ग्लोबल फिल्म मंच पर पहुंचने वाले पहले भारतीय IAS ऑफिसर बन गए हैं. उनकी पहली फिल्म ‘1946: Direct Action Day – The Erased History of Bengal’ का इस समारोह में प्रदर्शन किया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली.

एक भूले अध्याय को उजागर करती ऐतिहासिक फिल्म

यह फिल्म 1946 में बंगाल में हुए सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक घटनाक्रम पर आधारित है, जो भारत के बंटवारे से ठीक पहले हुआ था. इतिहास में कम चर्चा पाने वाली इन घटनाओं को फिल्म ने बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया है. फिल्म नागरिकता, पहचान और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से भी सीधे जुड़ती है.

“यह मेरा उद्देश्यपूर्ण सफर है”-अभिषेक सिंह

फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद अभिषेक सिंह ने कहा, “Cannes के रेड कार्पेट पर चलना एक सपना होता है और मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने देश की सेवा एक IAS अधिकारी के रूप में की और अब एक फिल्म निर्माता के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं. मेरी कोशिश हमेशा यह रही है कि ऐसी कहानियां कहूं जो वाकई में मायने रखती हैं.”

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प्रशासन से सिनेमा तक की प्रेरणादायक यात्रा

अभिषेक सिंह का सफर IAS ऑफिसर से लेकर सिनेमा की दुनिया तक बेहद प्रेरणादायक है. प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए उन्होंने कई साहसिक और नवाचारी कार्य किए. अब उन्होंने सिनेमा को सामाजिक परिवर्तन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम बना लिया है.

Cannes में मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना

फिल्म समीक्षकों ने ‘1946: Direct Action Day’ को “दृश्य रूप से शानदार और विषय में साहसी” बताया. फिल्म की स्क्रीनिंग में अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माता, इतिहासकार और सांस्कृतिक विशेषज्ञ मौजूद थे, जिन्होंने फिल्म को भारत के भूले-बिसरे इतिहास को सामने लाने वाला एक जरूरी प्रयास बताया.

भारतीय कहानियों को मिला नया वैश्विक मंच

भारत आज जब अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति को वैश्विक स्तर पर मज़बूत कर रहा है, अभिषेक सिंह की यह उपलब्धि नई राह दिखाती है. यह उदाहरण है कि लोक सेवा और रचनात्मक अभिव्यक्ति कैसे एक साथ विश्व मंच पर प्रभाव छोड़ सकती है. यह Cannes में अभिषेक सिंह की ऐतिहासिक उपस्थिति सिर्फ एक सिनेमाई उपलब्धि नहीं, बल्कि एक नई सोच, नए सफर और नए भारत की ओर इशारा करती है—जहां शासन और सृजनात्मकता का मिलन बदलाव की कहानी लिख रहा है.

-भारत एक्सप्रेस 

Akansha

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