देश

बलिया के नगवा पहुंचे सांसद मनोज तिवारी: शहीद मंगल पांडेय के लिए की ‘भारत रत्न’ की मांग, ममता सरकार पर भी साधा निशाना

Manoj Tiwari in Ballia: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी सुलझाने वाले महानायक मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवा (बलिया) में आज माहौल देशभक्ति के रंग में डूबा नजर आया. दिल्ली के भाजपा सांसद और मशहूर अभिनेता मनोज तिवारी यहां अमर शहीद मंगल पांडेय को नमन करने पहुंचे थे. यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री और बलिया सदर के विधायक दयाशंकर सिंह द्वारा आयोजित किया गया था.

शहीद की धरती पर खड़े होकर मनोज तिवारी भावुक दिखे. उन्होंने मंगल पांडेय के बलिदान को याद करते हुए एक बड़ी बात कही. तिवारी ने कहा, “मंगल पांडेय का कद ‘भारत रत्न’ जैसे सम्मानों से कहीं ऊपर है, लेकिन फिर भी एक सम्मान के नाते मैं उनके लिए भारत रत्न की मांग जरूर करूंगा.” उन्होंने आगे कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, उसकी नींव मंगल पांडेय जैसे वीरों के बलिदान पर टिकी है.

इतिहास के वो पन्ने, जिन्होंने देश को जगाया

आज से ठीक 169 साल पहले, यानी 8 अप्रैल 1857 को ही मंगल पांडेय को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी पर लटकाया था. नगवा के एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे मंगल पांडेय 1849 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हुए थे. वे बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 34वीं रेजिमेंट के सिपाही थे.

क्रांति की असली शुरुआत तब हुई जब सेना में ‘एनफील्ड राइफल’ आई, जिसके कारतूसों को मुंह से काटना पड़ता था. जब सैनिकों के बीच यह खबर फैली कि इन कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल हुआ है, तो मंगल पांडेय का खून खौल उठा. 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया और ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला बोल दिया. उनके इसी साहस ने पूरे देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला भड़का दी थी.

फांसी की तारीख और डरते हुए अंग्रेज

इतिहास गवाह है कि अंग्रेज मंगल पांडेय के नाम से इस कदर डर गए थे कि उन्हें तय तारीख से 10 दिन पहले ही फांसी दे दी गई. कोर्ट ने उन्हें 18 अप्रैल को फांसी देने का फैसला सुनाया था, लेकिन अंग्रेजों को डर था कि अगर देरी हुई तो बैरकपुर में बड़ा विद्रोह हो सकता है. लिहाजा, 8 अप्रैल 1857 की सुबह उन्हें परेड ग्राउंड में सूली पर चढ़ा दिया गया.

शहीद को श्रद्धांजलि देने के बाद मनोज तिवारी ने राजनीति पर भी अपनी बात रखी. पश्चिम बंगाल चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैं अभी बंगाल में 10 दिनों के प्रचार से लौटा हूं, जहां मैंने 18 जनसभाएं की हैं. वहां का माहौल साफ बता रहा है कि ममता दीदी की विदाई तय है.”

ये भी पढ़ें- अंबिकापुर में मुख्यमंत्री के आने से पहले ही ‘खेला’: चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का कांग्रेस ने किया अनावरण, सियासत गरमाई

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

Recent Posts

नवरात्रि में आज अष्टमी और नवमी का अद्भुत संगम, जानें आज के शुभ मुहूर्त सहित पूरा पंचांग

19 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी और महानवमी तिथि का विशेष संयोग बन…

17 seconds ago

राम भक्तों के लिए खुशखबरी! रामलला के दर्शन हुए और आसान, मुफ्त पास की बढ़ाई गई सीमा

अयोध्या राम मंदिर में रामलला के दर्शन अब और आसान हो गए हैं. ट्रस्ट ने…

8 hours ago

पीएम मोदी के विजन को मिली बड़ी रफ्तार: नमो भारत ने पूरे किए परिचालन के 3 सफल साल

पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई नमो भारत रैपिड रेल ने 3 सफल साल पूरे…

9 hours ago

अमित शाह का पंजाब सरकार पर हमला, बोले- नशे के खिलाफ आवाज दबाने वालों को नहीं छोड़ेंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर आम…

9 hours ago

राष्ट्र को अस्थिर करने वाली राजनीति से बचें; संविधान का सम्मान सर्वोपरि: इंद्रेश कुमार

लखनऊ में आयोजित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता सम्मेलन में डॉ. इंद्रेश कुमार ने देश…

9 hours ago