bengal election Phansidewa Booth Incident: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में जहां राजनीतिक दल एक-एक वोट के लिए संघर्ष कर रहे थे, वहीं दार्जिलिंग जिले के फांसीदेवा में एक ‘पति’ अपनी उस पत्नी के लिए घात लगाए बैठा था जो दो साल पहले उसे छोड़कर किसी और के साथ भाग गई थी. दरअसल फांसीदेवा के ताराबाड़ी (बूथ नंबर 25/238) पर गुरुवार को फिल्मी अंदाज में जो कुछ भी घटा, उसने ( Phansidewa Incident) लोकतंत्र के उत्सव के बीच सस्पेंस और हाई-वोल्टेज ड्रामे का तड़का लगा दिया.
ताराबारी प्राइमरी स्कूल के बाहर तैनात सुरक्षाबलों और मतदाताओं ने देखा कि सुबह से ही एक शख्स खामोश खड़ा था. उमस भरी गर्मी और पसीने से लथपथ होने के बावजूद वह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ. करीब 5 घंटे के इंतज़ार के बाद जैसे ही दोपहर के 2 बजे, एक महिला अपनी वोटर स्लिप लेकर बूथ की ओर बढ़ी, वह आदमी चीते की तरह उस पर झपटा. उसने महिला के बाल खींचे और उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया, जिससे वहां भगदड़ मच गई.
दरअसल, पति को पक्का यकीन था कि उसकी पत्नी वोट देने जरूर आएगी. इसकी वजह थी चुनाव आयोग का SIR (Special Intensive Revision) प्रोसेस. इस बार वोटर लिस्ट से नाम कटने को लेकर पूरे बंगाल में भारी चिंता थी. पति ने हिसाब लगाया था कि अगर उसकी पत्नी को अपना वोटर कार्ड (EPIC) चालू रखना है और सरकारी योजनाओं का लाभ लेना है, तो उसे अपने पुराने बूथ पर आना ही होगा. उसका यह ‘जहरीला हिसाब’ एकदम सटीक बैठा.
अचानक हुए इस हमले (Phansidewa Incident) को देखकर बूथ पर तैनात CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) के जवान तुरंत हरकत में आए. जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद महिला को उस शख्स के चंगुल से छुड़ाया. इस दौरान वह शख्स लगातार चिल्ला रहा था और गालियां दे रहा था. सुरक्षाबलों ने तुरंत स्थिति को काबू में किया और उस शख्स को हिरासत में लेकर बूथ से दूर ले गए, ताकि मतदान प्रक्रिया बाधित न हो.
काबू में किए जाने के बाद उस शख्स ने CAPF के सामने एक अजीब मांग रख दी. उसने चिल्लाते हुए कहा कि उसकी पत्नी को तब तक वोट देने की इजाज़त न दी जाए, जब तक कि उसके वोटर आईडी कार्ड से उसके पति के तौर पर उसका नाम नहीं हटा दिया जाता. उसका कहना था कि जब वह दो साल पहले किसी और के साथ भाग गई, तो अब कागजों में उसका नाम ढोने का उसे कोई हक नहीं है.
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पूछताछ में पता चला कि यह जोड़ा फांसीदेवा इलाके का ही रहने वाला था. दो साल पहले पत्नी अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी, जिसके बाद से पति उसकी तलाश में था. उसे पता था कि पत्नी कहीं भी छिपी हो, लेकिन वोट के अधिकार और ‘पहचान’ को बचाने के लिए वह इस बूथ पर जरूर आएगी. लोकतंत्र का यह पर्व उस पति के लिए अपना पुराना हिसाब चुकता करने का जरिया बन गया.
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटाना एक लंबी प्रक्रिया है और केवल पति के कहने पर किसी को मतदान से नहीं रोका जा सकता. महिला के पास वैध पहचान पत्र (EPIC Card) था, इसलिए उसे वोट डालने का पूरा हक था. हालांकि, इस घटना ने यह साबित कर दिया कि बंगाल चुनाव में केवल राजनीतिक दल ही नहीं बल्कि आम जनता भी अपनी व्यक्तिगत जंगों के लिए ‘बूथ’ को ही रणक्षेत्र बना रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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