सरकार ने संसद के चालू शीतकालीन सत्र में आर्थिक विकास, आधुनिकीकरण, रोजगार सृजन और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई परिवर्तनकारी विधेयक पेश किए हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन विधायी प्रस्तावों में तेल क्षेत्र, शिपिंग, रेलवे, विमानन और आपदा प्रबंधन शामिल हैं. इन विधेयकों का उद्देश्य भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और विकास को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक बदलाव करना है.
जिन विधेयकों को संसद में पेश किया गया है उनमें, ऑयलफील्ड्स (विनियमन और विकास) विधेयक, 2024, शब्दावली को आधुनिक बनाकर और अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन अन्वेषण को खोलकर औपनिवेशिक प्रथाओं से एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है. इसी तरह, मर्चेंट शिपिंग बिल, 2024, लैडिंग बिल, 2024 के साथ, समुद्री कानूनों को सुव्यवस्थित करने, उन्हें अधिक कुशल बनाने और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. मर्चेंट शिपिंग बिल मामूली उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड को हटाता है, जो कम दंडात्मक, अधिक सहायक नियामक ढांचे की ओर बढ़ने का संकेत देता है, जिससे समुद्री क्षेत्र को बढ़ावा मिलना चाहिए और भारत की वैश्विक व्यापार क्षमताओं में वृद्धि होनी चाहिए.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “यह भारत को पुराने औपनिवेशिक कानूनों से मुक्त करने, ऊर्जा क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को दर्शाता है.” हालांकि विपक्ष के विरोध के कारण शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में कोई कामकाज नहीं हुआ, लेकिन सरकारी सूत्रों को अगले सप्ताह से शुरू होने वाली सुचारू कार्यवाही के बारे में उम्मीद है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये विधेयक विधायी परिवर्तनों से कहीं अधिक हैं; वे “भारत के भविष्य का खाका” हैं. उन्होंने कहा, “उनका उद्देश्य औपनिवेशिक विरासत को मिटाना, आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सशक्त बनाना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और स्थायी प्रथाओं का संकल्प लेना है.” रेलवे (संशोधन) विधेयक, 2024 से कानूनी संरचनाओं को सरल बनाने और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के माध्यम से इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने की उम्मीद है, जिससे बुनियादी ढांचे और रखरखाव में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. तटीय शिपिंग विधेयक, 2024, रसद लागत को कम करके, भारतीय निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाकर और शिपिंग और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार पैदा करके इसका पूरक है.
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आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को पेश करता है, जो स्थानीय प्रतिक्रिया प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे सुरक्षा में वृद्धि होती है और खतरे की निगरानी और आपातकालीन सेवाओं में नौकरियां पैदा होती हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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