मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव (Datia By Election) पर इस वक्त पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं. पहले BJP ने यहां से दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा, जिस पर जमकर बवाल हुआ. लेकिन अब नरोत्तम और आशुतोष की चर्चाएं पीछे छूट गई हैं, क्योंकि दतिया की सियासत के केंद्र में अचानक एक नया चेहरा आ गया है- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अवधेश नायक (Awadhesh Nayak)! कांग्रेस के इस ‘असंतुष्ट’ नेता के घर बीजेपी के बड़े नेताओं का तांता लग गया है, जिसने चुनावी समीकरणों में भूचाल ला दिया है.
दतिया में नामांकन का दौर खत्म होते ही सियासी मेल-मुलाकातों ने हलचल तेज कर दी है. सबसे बड़ा उलटफेर तब दिखा जब बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी अचानक कांग्रेस नेता अवधेश नायक के घर पहुंच गए. दोनों के बीच बंद कमरे में करीब आधे घंटे तक ‘सीक्रेट’ गुफ्तगू हुई.
हैरानी की बात यह रही कि मुलाकातों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. देर रात शिवराज कैबिनेट के मंत्री राकेश शुक्ला भी अवधेश नायक के घर जा पहुंचे. हालांकि, अवधेश नायक इसे सिर्फ ‘सामान्य मुलाकात’ बता रहे हैं, लेकिन राजनीति में प्रतिद्वंद्वियों के बीच बंद कमरे की मुलाकातों के मायने कभी ‘सामान्य’ नहीं होते. दावा किया जा रहा है कि बीजेपी और आरएसएस (RSS) लगातार उन पर अपने पाले में आने का दबाव बना रही है.
अवधेश नायक का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है. उनकी जड़ें RSS और बीजेपी से ही जुड़ी रही हैं. वह 1993 में बीजेपी में आए, दतिया से चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार गए. बाद में वह उमा भारती की पार्टी में चले गए, फिर वापस बीजेपी में आए, लेकिन नरोत्तम मिश्रा से उनकी कभी नहीं पटी. इसी खींचतान के चलते 2023 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए. 2023 में कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार बनाया, लेकिन फिर टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को दे दिया. इस बार के उपचुनाव में भी वह प्रबल दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें किनारे करते हुए पूर्व विधायक कुंवर घनश्याम सिंह को टिकट थमा दिया.
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टिकट कटने के बाद अवधेश नायक और उनके समर्थक भारी गुस्से में थे. खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) उन्हें मनाने उनके घर पहुंचे थे. लेकिन अब बीजेपी इसी नाराजगी का फायदा उठाना चाहती है. बीजेपी की रणनीति दतिया में कांग्रेस के हर असंतुष्ट धड़े को अपने पाले में करने की है. यह लड़ाई अब सिर्फ दो पार्टियों की नहीं, बल्कि ‘प्रतिष्ठा’ की बन चुकी है. अब देखना यह है कि यह ‘खुफिया’ मुलाकात दतिया उपचुनाव में कौन सा नया गुल खिलाती है और क्या अवधेश नायक ‘किंगमेकर’ साबित होते हैं.
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