Delhi Encroachment: दक्षिण दिल्ली के इलाके नेहरू प्लेस (Nehru Place) में स्थित एपिक्यूरिया फूड मॉल (Epicuria Food Mall) के आसपास अवैध अतिक्रमण और भ्रष्टाचार के आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे कुछ वीडियो इस इलाके की वास्तविक स्थिति उजागर कर रहे हैं, जिनमें सड़क किनारे फैला अव्यवस्थित अतिक्रमण और उससे जुड़ी कथित रिश्वतखोरी को दिखाया गया है.
यह वीडियो एक वरिष्ठ पत्रकार सुबोध जैन द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि मेट्रो स्टेशन और मॉल के आसपास की सड़कें असंगठित रूप से फैले रेहड़ी-पटरी वालों से भरी पड़ी हैं. ये दुकानदार छाते और तिरपाल के नीचे सामान बेचते नजर आ रहे हैं, जिससे पैदल चलने वालों को भारी परेशानी होती है. साथ ही, जगह-जगह कूड़े-कचरे के ढेर और बदबू की वजह से वातावरण भी दूषित हो चुका है.
पत्रकार सुबोध जैन ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया है कि दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के कुछ अधिकारी इन अवैध दुकानदारों से मोटी रकम लेकर उन्हें व्यापार करने की अनुमति देते हैं. उन्होंने लिखा, “नेहरू प्लेस में एक मॉल है, जिसका नाम एपिक्यूरिया फूड मॉल है.” उन्होंने यह भी दावा किया कि इन दुकानदारों से हर महीने लाखों रुपए वसूले जाते हैं, जो कथित तौर पर अधिकारियों की जेब में जाते हैं.
एक अन्य वायरल वीडियो में कथित छापेमारी के बाद का दृश्य भी सामने आया है, जहां कई ठेले और स्टॉल उल्टे पड़े दिख रहे हैं और पूरे इलाके में मलबा फैला हुआ है. यह वीडियो इस बात की ओर इशारा करता है कि जब भी कोई कार्रवाई होती है, तो उसकी वजह से आम जनता को भी भारी असुविधा झेलनी पड़ती है.
इलाके के दुकानदारों और स्थानीय निवासियों ने इस समस्या पर गहरी नाराजगी जताई है. एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह सिर्फ जगह की बात नहीं है, यहां गंदगी और बीमारी फैलने का भी खतरा है. रोज़ यहां कूड़ा फैला दिया जाता है.”
इस पूरे मामले ने दिल्ली में शहरी प्रबंधन और भ्रष्टाचार पर फिर से बहस छेड़ दी है. जैन ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और दिल्ली के उपराज्यपाल को टैग करते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में MCD द्वारा कुछ अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए गए थे, जिससे लोगों में थोड़ी उम्मीद जगी है.
गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी नेहरू प्लेस की हालत पर नाराजगी जता चुका है. कोर्ट ने 2021 में इलाके की तुलना “झुग्गी बस्ती” से करते हुए कहा था कि फुटपाथ पर व्यापार करने वालों और आम नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है ताकि साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके.
फिलहाल, न तो दिल्ली नगर निगम और न ही दिल्ली पुलिस ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है. हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल होते इन वीडियो और बढ़ते जनदबाव को देखते हुए यह मामला जल्द ही प्रशासनिक जांच के दायरे में आ सकता है. इससे दिल्ली में शहरी योजनाओं और भ्रष्टाचार से जुड़ी खामियों पर एक बार फिर सवाल उठ सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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