Fraud In The Name Of Rahul Gandhi: विक्रम सिंह/कुरुक्षेत्र: हरियाणा की सियासत और कुरुक्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक ऐसी हाई-प्रोफाइल ठगी की चर्चा है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. कांग्रेस पार्टी के दो बड़े और रसूखदार नेताओं को केंद्रीय आलाकमान से नजदीकी और संगठन में बड़ा पद दिलाने का ऐसा झांसा दिया गया कि वे पलक झपकते ही लाखों रुपये गंवा बैठे. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी ठगी की स्क्रिप्ट जेल की सलाखों के पीछे से लिखी गई थी.
ठग ने खुद को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बेहद खास सचिव ‘कनिष्क सिंह’ (Fake Rahul Gandhi Secretary) बताया और केवल एक व्हाट्सएप कॉल के जरिए हरियाणा के दिग्गज नेताओं की जेब से 10 लाख रुपये साफ कर दिए. आइए विस्तार से समझते हैं कि कैसे इस फर्जी सचिव ने इस पूरी ठगी को अंजाम दिया.
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब कुरुक्षेत्र के एक पीसीसी (PCC) सदस्य और कांग्रेस के जिला संगठन सचिव के मोबाइल पर एक अज्ञात व्हाट्सएप कॉल आई. कॉल करने वाले ने बेहद रौबदार आवाज में कहा, कि हेलो, मैं राहुल गांधी का सचिव कनिष्क सिंह बोल रहा हूं. ठग ने दोनों नेताओं को झांसा दिया कि कांग्रेस के ‘संगठन सृजन कार्यक्रम’ के तहत उत्तराखंड के नेताओं के लिए चंडीगढ़ में एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसकी पूरी व्यवस्था और फंडिंग का जिम्मा उन्हें उठाना है.
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केंद्रीय नेतृत्व में अपनी पैठ मजबूत करने और बड़ा पद पाने की चाहत में दोनों नेता बिना कोई जांच-पड़ताल किए इस जाल में फंस गए. ठग के निर्देशानुसार दोनों नेताओं ने पांच-पांच लाख रुपये मिलाकर कुल 10 लाख रुपये की व्यवस्था की. इसके बाद वे चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित जेडब्ल्यू मैरियट होटल पहुंचे. रात के करीब 11 बजे होटल की पार्किंग में उनकी मुलाकात खुद को ‘दीपक’ बताने वाले एक शख्स से हुई. उस शख्स ने फोन पर दोबारा फर्जी सचिव ‘कनिष्क सिंह’ से उनकी बात करवाई, जिसके बाद नेताओं ने पूरे भरोसे के साथ 10 लाख रुपये से भरा बैग उसे सौंप दिया.
पैसे देने के कुछ दिनों बाद जब दोनों नेताओं ने कार्यक्रम के बारे में पता लगाने की कोशिश की तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. उन्हें पता चला कि चंडीगढ़ में ऐसा कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय ही नहीं था. हकीकत यह थी कि हरियाणा और उत्तराखंड के लिए कांग्रेस का यह कार्यक्रम कुरुक्षेत्र की ही एक पंजाबी धर्मशाला में होना निर्धारित था.
शुरुआत में कुरुक्षेत्र के इन दोनों नेताओं ने राजनीतिक बदनामी और जगहंसाई के डर से पूरी तरह चुप्पी साध ली थी, लेकिन जब उन्हें पता चला कि यह ठग उत्तराखंड के भी कई अन्य नेताओं को अपना शिकार बना चुका है, तब उन्होंने कुरुक्षेत्र के एसपी चंद्रमोहन को मामले की लिखित शिकायत सौंपी.
थाना शहर प्रभारी नरेश कुमार ने जब व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड्स और फोटो की गहन डिजिटल फॉरेंसिक जांच की, तो इस हाई-प्रोफाइल ठगी के पीछे छुपा असली चेहरा सामने आ गया. खुद को राहुल गांधी का सचिव बताने वाला असल में पंजाब के अमृतसर का रहने वाला गौरव कुमार शर्मा उर्फ गौरा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वह वर्तमान में उत्तराखंड के देहरादून की राजपुर जेल में एक अन्य धोखाधड़ी के मामले में पहले से ही बंद है. यानी उसने जेल के भीतर से ही मोबाइल के जरिए इस पूरी ठगी को अंजाम दिया.
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चंडीगढ़ के होटल की पार्किंग में 10 लाख रुपये वसूलने वाला कथित दीपक असल में सिरसा (डबवाली) का रहने वाला रजत कुमार है, जो फिलहाल पैसे लेकर फरार है. कुरुक्षेत्र पुलिस ने एसपी कार्यालय की संस्तुति के बाद मामला दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपी को देहरादून जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाने की तैयारी शुरू कर दी है.
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