पश्चिम बंगाल की राजनीति में भ्रष्टाचार और ‘कट मनी’ के आरोपों को लेकर भाजपा और TMC के बीच आर-पार की जंग छिड़ी हुई है. इस सियासी घमासान के बीच भाजपा ने ममता बनर्जी के खिलाफ एक ऐसा सनसनीखेज और अनोखा मामला उजागर किया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तहलका मचा दिया है. भाजपा ने डायमंड हार्बर क्षेत्र में एक ऐसे सरकारी पुल की पोल खोली है, जो कागजों और सरकारी बोर्ड पर तो पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन जमीन पर उसका वजूद ही नहीं है
भाजपा ने बकायदा सबूतों के साथ इस गायब पुल को ‘ममता बनर्जी का मिस्टर इंडिया पुल’ करार दिया है. सरकारी दस्तावेजों में लाखों रुपये की लागत से बना यह पुल असलियत में पूरी तरह गायब है और उस जगह पर पुल की बजाय सिर्फ पानी लहरा रहा है और बत्तखें तैर रही हैं. भाजपा ने इसे टीएमसी के तथाकथित ‘विकास मॉडल’ का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए तीखा तंज कसा है.
ममता बनर्जी का ‘मिस्टर इंडिया’ पुल!
बजट: 9 लाख, हकीकत: गायब! ❌सरकारी बोर्ड पर ₹9,24,462 का पुल पूरा हो चुका है, लेकिन जमीन पर सिर्फ पानी और बत्तखें तैर रही हैं!
इसे कहते हैं TMC का डायमंड हार्बर मॉडल — जहां काम सिर्फ कागजों पर होता था और पैसा सीधे उनके नेताओं की जेब में… pic.twitter.com/HBpXAoPgUW
— BJP (@BJP4India) June 29, 2026
क्या है पदमती ग्राम पंचायत का यह मामला?
यह पूरा मामला दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाले डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के पदमती-1 ग्राम पंचायत का है. सरकारी बोर्ड में पदमती क्षेत्र में एक आधिकारिक सरकारी बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि 9,24,462 रुपये की लागत से इस स्थान पर पुल निर्माण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. जब स्थानीय स्तर पर इस पुल की जांच की गई, तो वहां कंक्रीट या लोहे का एक टुकड़ा भी नजर नहीं आया. पुल की जगह पर केवल गहरा पानी जमा है, जिसमें स्थानीय बत्तखें तैरती हुई दिखाई दे रही हैं.
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भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस ‘कागजी पुल’ का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं. विपक्ष का सीधा आरोप है कि टीएमसी के राज में विकास योजनाएं सिर्फ फाइलों और विज्ञापनों तक सीमित हैं, जबकि जनता के टैक्स का पैसा सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के नेताओं की जेबों में जा रहा है. इसे ममता सरकार की ‘सिस्टेमेटिक लूट’ और ‘कट मनी कल्चर’ (कमीशनखोरी) का जीवंत प्रमाण बताया जा रहा है.
‘डायमंड हार्बर मॉडल’ पर उठे गंभीर सवाल
यह विवाद इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ रहा है क्योंकि डायमंड हार्बर क्षेत्र टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के कद्दावर सांसद अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है. हाल के महीनों में इस हाई-प्रोफाइल संसदीय क्षेत्र से वित्तीय अनियमितताओं के कई बड़े मामले उजागर हुए हैं. डायमंड हार्बर नगर पालिका बोर्ड में फंड्स के हेरफेर के गंभीर आरोप लगने के बाद कई टीएमसी पार्षदों (काउंसिलरों) को इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद पूरे बोर्ड को भंग कर दिया गया था.
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