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जेल से सरकार चलाना मंजूर? पीएम-सीएम इतने दिनों तक जेल में रहेंगे तो जाएगी कुर्सी, 130th Constitutional Amendment पर सियासी संग्राम तेज

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की गिरफ्तारी के बाद भी पद पर बने रहने की घटना ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है. इसी मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार ने 130वां संविधान संशोधन (130th Constitutional Amendment) बिल पेश किया. जिससे यह तय हो सके कि कोई मंत्री या मुख्यमंत्री जेल में रहते हुए सरकार नहीं चला सके. लेकिन इस बिल को लेकर संसद में जबरदस्त विरोध देखने को मिला.

सरकार का क्या कहना है?

सरकार का कहना है कि अगर विपक्ष इस बिल का विरोध करता है तो यह साफ संदेश जाएगा कि विपक्ष को जेल से सरकार चलाने में कोई आपत्ति नहीं है. वहीं सरकार खुद भी कह रही है कि अगर बिल पास नहीं होता तो उसे कोई परेशानी नहीं है. सरकार का मकसद सिर्फ जनता के सामने विपक्ष की सोच को उजागर करना है.

मॉनसून के आखिरी दिन बिल पेश

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन बिल पेश करना भी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. सरकार ने बिल के साथ ही इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव रखा ताकि सभी दलों की राय ली जा सके. लेकिन संभावना है कि विपक्ष इस समिति का बहिष्कार कर सकता है. जिससे समिति में सिर्फ सत्ता पक्ष के सदस्य रह जाएंगे.

डीएमके मंत्री सेंथिल को देना पड़ा था इस्तीफा

दिल्ली के मामले के अलावा तमिलनाडु में डीएमके मंत्री सेंथिल की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट के निर्देश पर इस्तीफा देना पड़ा था. ऐसे उदाहरणों ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि संविधान में स्पष्टता होनी चाहिए.

विपक्ष का विरोध क्यों?

विपक्ष का विरोध जांच एजेंसियों के तथाकथित दुरुपयोग को लेकर है. उनका कहना है कि सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को फंसाने में किया जा सकता है.

बिल में क्या है प्रावधान?

बिल में प्रावधान है कि अगर कोई मंत्री 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहता है तो 31वें दिन उसे पद से हटाया जा सकता है. विपक्ष को डर है कि इसका राजनीतिक फायदा उठाया जा सकता है.

विपक्ष के आरोप को सरकार ने खारिज किया

सरकार इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहती है कि गिरफ्तारी से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन होता है और अदालत का सहारा लिया जा सकता है.

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बिल को पास करने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी है जो सरकार के पास नहीं है. ऐसे में यह मुद्दा सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि एक बड़ी राजनीतिक बहस बन गया है.

-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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