US Tariffs Impact on India: वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ़ से भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. एजेंसी का मानना है कि भारतीय सरकार लगातार आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढाँचे के विकास और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
S&P ने 18 साल बाद भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाकर ‘BBB’ (स्थिर आउटलुक) कर दिया है. इसके पीछे एजेंसी ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, वित्तीय अनुशासन के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने वाली मौद्रिक नीति को प्रमुख कारण बताया.
आने वाले वर्षों में 6.8% औसत वृद्धि
S&P के निदेशक यीफर्न फुआ (YeeFarn Phua) ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि अगले तीन वर्षों तक भारत की वृद्धि दर औसतन 6.8 प्रतिशत के आसपास बनी रहेगी यदि देश में बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी बेहतर होती है तो यह बाधाओं को दूर करेगा और भारत की संभावित विकास दर को और ऊँचाई तक ले जाएगा’.
उन्होंने यह भी कहा कि बीते 3-4 वर्षों में भारत ने क्षेत्रीय देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है और विश्व की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है.
अमेरिकी टैरिफ का सीमित असर
S&P एशिया पैसिफिक अर्थशास्त्री विश्रुत राणा ने समझाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा घरेलू मांग पर आधारित है करीब 85 प्रतिशत अर्थव्यवस्था घरेलू खपत से संचालित होती है जबकि बाहरी मांग का हिस्सा मात्र 15 प्रतिशत है.
उन्होंने कहा, ‘यही वजह है कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ़ का गहरा असर नहीं होगा इसके अलावा, 50 प्रतिशत की ऊँची ड्यूटी सभी भारतीय उत्पादों पर लागू नहीं है कुछ क्षेत्रों जैसे फार्मा और कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट भी मिली है’.
हालांकि राणा ने यह माना कि अल्पकाल में निवेशकों के भरोसे पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन मध्यम और लंबी अवधि में भारत का ढाँचा, सुधार और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल विकास की गति को बनाए रखेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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