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‘कथाकार की डायरी’ ने जीता दिल, ट्रांस समुदाय हुआ भावुक, अर्जेंटीना में होगा प्रीमियर

Kathakar Ki Diary film: स्वतंत्र सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही फिल्म ‘कथाकार की डायरी’ एक बार फिर सुर्खियों में है. जज्बे, संघर्ष और उम्मीद की सशक्त कहानी को बयां करती यह लो-बजट फिल्म अब अर्जेंटीना के प्रतिष्ठित ब्यूनस आयर्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने जा रही है. फिल्म का निर्देशन आईआरएस अधिकारी अन्वेष ने किया है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद एक प्रभावशाली सामाजिक कथा को पर्दे पर उतारा है.

ट्रांस समुदाय की कहानियां

फिल्म का असर उस वक्त साफ देखने को मिला, जब एक फिल्म फेस्टिवल स्क्रीनिंग के दौरान इसे देखने के बाद ट्रांसजेंडर समुदाय के दर्शक भावुक हो गए और कई की आंखें नम हो उठीं. ‘कथाकार की डायरी’ पांच अलग-अलग पात्रों की कहानियों को आपस में पिरोती है, जो समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों की पीड़ा, संघर्ष और आत्मसम्मान की लड़ाई को उजागर करती हैं. इनमें हिल खरिया जनजाति और ट्रांस समुदाय की कहानियां खास तौर पर दर्शकों को झकझोरती हैं.

इस फिल्म की एक खास बात यह भी है कि इसमें ओडिशा, झारखंड और महाराष्ट्र के करीब 200 से अधिक स्वतंत्र कलाकारों और तकनीशियनों ने मिलकर काम किया है. यह फिल्म समुदाय-आधारित कहानी कहने की ताकत का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है.

‘कथाकार की डायरी’ को अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहना मिल चुकी है.

  1. इंटरनेशनल न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में ‘नो बजट कैटेगरी’ में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला
  2. 31वें कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में नेटपैक अवॉर्ड के लिए नामांकन मिला
  3. अबुजा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्सपेरिमेंटल फिल्म के लिए नामांकित किया गया.
  4. 12वें डायरेक्टर्स कट इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म का पुरस्कार भी जीता

वहीं जागरण फिल्म फेस्टिवल, थर्ड आई एशियन फिल्म फेस्टिवल, साउथ एशियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (फ्लोरिडा) में इसे आधिकारिक चयन मिला.


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अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से बड़ी उम्मीद

वरिष्ठ अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने फिल्म की सराहना करते हुए इसकी तुलना सत्यजीत रे और मृणाल सेन जैसे दिग्गज फिल्मकारों की संवेदनशील फिल्मों से की है. अब अर्जेंटीना में होने वाले प्रीमियर को लेकर फिल्म की पूरी टीम उत्साहित है और उन्हें उम्मीद है कि यह कहानी अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को भी यह एहसास कराएगी कि आम लोगों की जिंदगी में छिपी कहानियां ही हमारी सामूहिक मानवता को परिभाषित करती हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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