कोलकाता की पहचान मानी जाने वाली कॉलेज स्ट्रीट अब एक नए अंदाज में नजर आ सकती है. पश्चिम बंगाल सरकार ने इस ऐतिहासिक इलाके को लंदन की मशहूर ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट की तर्ज पर विकसित करने की योजना बनाई है. इसी योजना की तैयारियों को देखने के लिए राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल आज (बुधवार) को कॉलेज स्ट्रीट पहुंचीं और पूरे इलाके का जायजा लिया है.
मंत्री ने कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) की कमिश्नर स्मिता पांडे और अन्य अधिकारियों के साथ इलाके का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद दुकानदारों और पैदल चलने वाले लोगों से बातचीत कर उनकी राय भी जानी. सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद कॉलेज स्ट्रीट को ऐसा स्थान बनाना है, जहां लोग किताबों के साथ समय बिता सकें और एक शांत, सांस्कृतिक माहौल का अनुभव कर सकें.
योजना के अनुसार, कॉलेज स्ट्रीट के एक हिस्से को ‘नो-व्हीकल जोन’ बनाया जाएगा. यहां गाड़ियों की आवाजाही नहीं होगी, ताकि लोग आराम से घूम सकें, किताबें देख सकें और पढ़ने का आनंद ले सकें. इस इलाके में साइकिल चलाने की सुविधा भी होगी, लेकिन लोग अपनी साइकिल लेकर नहीं आएंगे. इसके लिए खास साइकिल स्टैंड बनाए जाएंगे, जहां से लोग साइकिल ले सकेंगे.
अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल दुनिया और मोबाइल की बढ़ती निर्भरता से बाहर निकालकर फिर से किताबों और पढ़ने की आदत की ओर आकर्षित करना है. उन्होंने कहा कि इस इलाके में किताबों की दुकानें, नोटबुक की दुकानें और बुक कैफे बनाए जाएंगे. लोगों के बैठने के लिए बेंच लगाई जाएंगी और बुजुर्गों की सुविधा के लिए बैटरी से चलने वाली छोटी गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी.
उन्होंने कहा कि इस जगह पर शांति का माहौल तैयार किया जाएगा, जहां लोग बिना शोर-शराबे के किताबें पढ़ सकेंगे या आराम से समय बिता सकेंगे.
सरकार की योजना के तहत फुटपाथ और आसपास के इलाकों को एक खास थीम के अनुसार सजाया जाएगा. किताबों की दुकानों को भी एक जैसे डिजाइन वाले स्टॉल में व्यवस्थित करने की तैयारी है. पुराने अंदाज के विंटेज लैंप-पोस्ट, बैठने की जगह और मुफ्त वाई-फाई जैसी सुविधाएं भी विकसित करने का प्रस्ताव है.
हालांकि, फिलहाल मुख्य कॉलेज स्ट्रीट की सड़क को नहीं बदला जाएगा, क्योंकि यह कोलकाता के यातायात के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है. पहले चरण में सड़क किनारे मौजूद दुकानों और आसपास के हिस्सों को बेहतर तरीके से विकसित किया जाएगा.
कॉलेज स्ट्रीट सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि कोलकाता की बौद्धिक और साहित्यिक पहचान का हिस्सा है. इसे दुनिया के सबसे बड़े सेकंड-हैंड बुक मार्केट में गिना जाता है. यहां फुटपाथ पर लगी सैकड़ों दुकानों में दुर्लभ किताबों से लेकर स्कूल की किताबें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सामग्री, पुराने उपन्यास और अकादमिक किताबें आसानी से मिल जाती हैं.
इस इलाके की खासियत यह भी है कि यहां कई ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान मौजूद हैं. कलकत्ता यूनिवर्सिटी, प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, संस्कृत कॉलेज और यूनिवर्सिटी, हिंदू स्कूल और हेयर स्कूल जैसे संस्थानों ने इस जगह को शिक्षा और विचारों का केंद्र बनाया है.
कॉलेज स्ट्रीट की पहचान मशहूर इंडियन कॉफी हाउस से भी जुड़ी है, जहां वर्षों से लेखक, कलाकार, शिक्षक और राजनीतिक विचारक बैठकर चर्चा करते आए हैं. अब अगर सरकार की यह योजना जमीन पर उतरती है, तो कॉलेज स्ट्रीट अपनी पुरानी विरासत को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ एक नए रूप में सामने आ सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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